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मनमाने तरीके से नहीं बढ़ेंगीं प्रॉपर्टी की कीमतें, बतानी होगी वजह

6 वर्ष पहले
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भोपाल. कलेक्टर गाइडलाइन के तहत प्रॉपर्टी की कीमतें तय करने का काम इस बार पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड होगा। पंजीयन मुख्यालय ने इसके लिए संपदा नामक सॉफ्टवेयर बनाया है। उपमूल्यांकन समिति से लेकर केंद्रीय मूल्यांकन समिति तक के सभी अधिकारी कीमतें प्रस्तावित करने और इसे अंतिम रूप देने का काम इसी सॉफ्टवेयर से करेंगे।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कीमतें तय करने में अधिकारियों व बिल्डर्स की मर्जी नहीं चलेगी। शुरूआती स्तर पर जो कीमतें प्रस्तावित की गईं हैं, उनमें कमी या बढ़ोतरी करने के लिए जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति को स्पष्ट तर्क देना होगा।
पंजीयन मुख्यालय ने कलेक्टर गाइडलाइन के तहत कीमतें तय करने के लिए कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है। 7 मार्च तक उपमूल्यांकन समिति को प्रारंभिक कीमतें तय करनी होंगी। 23 मार्च तक जिला मूल्यांकन समिति इसे अंतिम रूप देगी। पंजीयन मुख्यालय के अफसरों के अनुसार पूरे प्रदेश में ई-रजिस्ट्री की व्यवस्था लागू करने के लिए सॉफ्टवेयर बनाया गया है। इसमें गाइडलाइन की कीमतें तय करने के लिए भी ऑप्शन रखा गया है।
इस बार राजधानी सहित पूरे प्रदेश में इसी सॉफ्टवेयर से कीमतें तय करने का काम किया जाएगा। ऐसा इसलिए भी किया जा रहा है, ताकि पंजीयन अधिकारी इस ऑनलाइन सिस्टम के अभ्यस्त हो सकें। इसका फायदा यह होगा कि किस क्षेत्र में कितनी बढ़ोतरी प्रस्तावित की जा रही है, इस पर पंजीयन मुख्यालय भी नजर रखेगा।

हर आपत्ति की होगी सुनवाई
इस सॉफ्टवेयर का फायदा यह होगा कि प्रस्तावित कीमतों पर हर सुझाव व आपत्ति का हिसाब रहेगा। इससे यह भी स्पष्ट होगा कि किस स्थान की कीमत पर किस व्यक्ति ने क्या आपत्ति की थी। उस आपत्ति का क्या निराकरण हुआ। हर आपत्ति की सुनवाई होगी और अधिकारी जवाबदेही के साथ कीमत तय करेंगे। प्रस्तावित कीमतों पर दावे-आपत्ति के लिए दस दिन का समय मिलेगा।
अपार्टमेंट में लक्जरी सुविधा तो ज्यादा बढ़ेंगीं कीमतें
शहर में ऐसे अपार्टमेंट जहां क्लब हाउस, स्वीमिंग पुल जैसी लक्जरी सुविधाएं हैं, वहां कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी प्रस्तावित की जा सकती है। पंजीयन अधिकारियों के मुताबिक कीमतें प्रस्तावित करने से पहले वहां की पुरानी कीमत व सुविधाओं का भी अध्ययन किया जाएगा। हालांकि यह नहीं बताया गया कि यहां कितनी कीमत बढ़ाना प्रस्तावित है।
अगले सप्ताह होगी बैठक
कलेक्टर गाइडलाइन के तहत कीमतें तय करने के लिए उपमूल्यांकन समिति की पहली बैठक जनवरी में हो चुकी है। इसमें राजस्व व पंजीयन अधिकारियों ने निगम सीमा में शामिल छान, भौंरी, नीलबड़ सहित अन्य गांवों की कॉलोनियों की पूरी जानकारी नगर निगम अधिकारियों से हासिल कर ली है।
अब यहां सर्वे चल रहा है। अगले हफ्ते फिर इस संबंध में बैठक होगी। इसके बाद कीमतों में बढ़ोत्तरी का प्रारंभिक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। उपमूल्यांकन समिति की प्रमुख हुजूर एसडीएम माया अवस्थी ने बताया कि अगले दो-तीन दिनों में फिर समिति की बैठक बुलाई जाएगी।