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डाउनलोड करेंभोपाल. लोकायुक्त पीपी नावलेकर ने कहा है कि सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात तो ठीक है लेकिन भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति भी देनी चाहिए। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा है कि भ्रष्ट अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति के 71 प्रकरण लंबित पड़े हैं, जिसकी वजह से न्यायालय में चालान पेश नहीं हो पा रहे हैं।
नावलेकर ने कहा है- मुझे खेद है कि भ्रष्ट अफसरों व कर्मचारियों के खिलाफ राज्य शासन एवं सरकार के उपक्रम और नगरीय निकाय अभियोजन की स्वीकृति नहीं दे रहे हैं। उन्होंने पत्र के साथ लंबित प्रकरणों की सूची भेजकर कहा है कि संबंधित विभागों को कड़े निर्देश जारी करें। मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि लोकायुक्त ने शासन की नई पारी में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की मुख्यमंत्री की मंशा की प्रशंसा की है।
जीएडी ने लिखा विभागों को पत्र : लोकायुक्त का पत्र 20 जनवरी को सीएम सचिवालय पहुंचा था। अब सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने सभी विभागों को पत्र लिखकर कहा है कि लोकायुक्त संगठन द्वारा जिन प्रकरणों में अभियोजन की स्वीकृति के लिए लंबित प्रकरणों की समीक्षा जल्दी मुख्यमंत्री करेंगे। इन प्रकरणों के संबंध में कार्यवाही पूर्ण कर तीन दिन में भेजी जाए।
सबसे अधिक राजस्व के प्रकरण : लोकायुक्त द्वारा भेजी गई सूची के मुताबिक अभियोजन की स्वीकृति के सबसे अधिक प्रकरण राजस्व विभाग में लंबित हैं। सतना जिले में पटवारी कमलेश तिवारी के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति का प्रकरण 17 अक्टूबर 12 से लंबित पड़ा है। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास, खनिज, नगरीय प्रशासन एवं विकास, स्कूल, ऊर्जा, पीएचई, सहकारिता, कृषि और वाणिज्यिक कर विभाग में भ्रष्ट अफसरों व कर्मचारियों के मामले लंबित हैं।
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