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सड़ रहीं दुर्लभ किताबें, डेढ़ लाख से ज्यादा किताबों की देखरेख नहीं

8 वर्ष पहले
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भोपाल. शासकीय हमीदिया कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की लाइब्रेरी में करोड़ों रुपए की दुर्लभ किताबें बोरों में सड़ रहीं हैं। पिछले नौ साल से लाइब्रेरी के बंद कमरे में धूल खा रहीं करीब डेढ़ लाख से ज्यादा किताबों में या तो दीमक लग चुकी हैं या फिर उनके पन्ने पूरी तरह खराब हो चुके हैं। बर्बाद हो चुकी इन किताबों में देश के वायसराय रहे लॉर्ड कर्जन और रूसी कम्युनिस्ट नेता ब्लादिमीर लेनिन की जीवनी के अलावा दुर्लभ ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी सहित अन्य किताबें शामिल हैं। ज्यादातर किताबें ऐसी हैं, जिनका प्रकाशन आजादी के दौरान और उसके पहले हो चुका था।

बताया जाता है कि कॉलेज की लाइब्रेरी में करीब 1 लाख 70 हजार किताबें हैं लेकिन केवल 10 हजार किताबें ही बाहर रखी गईं हैं, जो छात्रों को जारी की जाती हैं। जबकि 1 लाख 60 हजार किताबें वर्ष 2005 से ही कमरों में बंद हैं। बीते नौ साल से ये किताबें किसी भी छात्र को इश्यू नहीं की गईं। किताबों की खराब स्थिति को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ बुधवार को प्रदर्शन किया।

कार्यकर्ताओं ने किताबों की इस स्थिति के लिए पूर्व लाइब्रेरियन आरएस भट्ट को जिम्मेदार ठहराया है। परिषद के प्रांत सह मंत्री रूपेश दीक्षित का कहना है कि वर्ष 2005 से लेकर 2013 तक लाइब्रेरियन रहे भट्ट ने कोई काम नहीं किया था। इस दौरान उन्हें दिए गए वेतन की वसूली की जानी चाहिए। इस संबंध में परिषद ने प्राचार्य को ज्ञापन भी सौंपा है। साथ ही इस मामले में भट्ट के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।

ताला तोड़कर लिया चार्ज
प्राचार्य डॉ. सुधा सिंह ने माना कि लाइब्रेरी में रखी किताबों की स्थिति खराब हुई हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2013 में भट्ट का तबादला हो गया था, लेकिन वे किसी को चार्ज सौंपकर नहीं गए थे। बाद में लाइब्रेरी का ताला तोड़कर चार्ज लेना पड़ा तथा किताबों की छंटनी व गिनती शुरू की गई। उन्होंने यह काम फरवरी तक पूरा होने की संभावना जताई है। परिषद ने लाइब्रेरी से करोड़ों की किताबें चोरी होने का भी आरोप लगाया है जबकि प्राचार्य ने गिनती पूरी होने के बाद ही स्थिति साफ होने की बात कही है।