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दोबारा हुए वार्ड आरक्षण में कुछ दावेदारों के चेहरे खिले तो कुछ के हिस्से आई मायूसी

7 वर्ष पहले
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(भोपाल नगर निगम)
भोपाल. हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर से हुए वार्ड परिसीमन में 85 वार्डों की सीमाओं में भले ही सरकार ने बदलाव नहीं किया, लेकिन इनमें आरक्षण के लिए बुधवार को निकली लॉटरी ने पार्षद पद के कई दावेदारों के समीकरण बिगाड़ दिए। कुछ की किस्मत ने फिर से साथ दिया तो कुछ की दगा दे गई। कुछ वरिष्ठ पार्षद तो वार्ड आरक्षण के कारण चुनाव लड़ने से पहले ही बाहर हो गए हैं। आरक्षण के लिए दोबारा हुई लाॅटरी के बाद 20 ऐसे वार्ड रहे, जिनमें बदलाव नहीं हुआ, जबकि 65 वार्डों में आरक्षण की तस्वीर बदल गई है। इस बार कोलार और बैरागढ़ क्षेत्र को राहत मिली है। यहां 12 वार्डों में सिर्फ दो वार्ड ही ओबीसी और एससी के लिए आरक्षित हुए हैं।
गांधी मेडिकल कॉलेज के ऑडिटोरियम में शुरू हुई आरक्षण प्रक्रिया को शोरशराबे और हंगामे के कारण दो बार रोकना पड़ा। करीब दो घंटे चली प्रक्रिया में 85 में से 50 वार्ड अनारक्षित रहे। इसमें से 24 वार्ड अनारक्षित महिलाओं के लिए हैं। एससी और एसटी का आरक्षण आबादी के आधार पर हुआ।
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