एनआईटीटीटीआर में आयोजित एनएओपी के 24वें नेशनल कन्वेंशन के समापन अवसर पर रविवार को हिस्सा लेने आए विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन के स्कॉलर रोनाल्ड फिशर ने बताया भारत की खासियतों के बारे में...
भोपाल. नेशनल एकेडमी ऑफ साइकोलॉजी (एनएओपी) के 24वें नेशनल कन्वेंशन का रविवार को समापन हुआ। NITTTR में आयोजित कन्वेंश में दुनियाभर के 300 से ज्यादा डेलिगेट्स शामिल हुए। यहां 350 से अधिक रिसर्च पेपर्स प्रेजेंट किए गए।
युवाओं पर जताई चिंता
कन्वेंशन में पेस यूनिवर्सिटी, अमेरिका की प्रो. सोनिया सचदेव ने ‘ग्लोबलाइजेशन, स्ट्रेस एंड द यूथ इन अरबन इंडिया’ विषय पर अपनी बात रखी। युवाओं पर की गई रिसर्च के आधार पर उन्होंने कहा कि पॉजिटिव सोच रखने वाले लोगों के लिए 'ग्लोबलाइजेशन' के मायने "ग्लोबल विलेज' से हैं। वहीं, निगेटिव सोच रखने वालों के लिए यह 'संसाधनों और बाजार की प्रतिस्पर्धा' हो सकती है। साल 2020 तक भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सर्वाधिक होगी। ऐसे में कुछ आंकड़े चौंकाने और चिंतित करने वाले हैं। इनमें 15 से 21 साल के युवाओं की आत्महत्या करने की दर भी अधिक है। इसके अलावा उन्होंने लड़के-लड़कियों के बीच में होने वाले भेदभाव, देश में पोषण की स्थिति पर भी अपनी बात रखी।
यह देश अनोखा
नेशनल कन्वेंशन में विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन (न्यूजीलैंड) के रिसर्च स्कॉलर रोनाल्ड फिशर भी हिस्सा लेने आए। इस मौके पर उन्होंने साइकोलॉजी पर अपने विचार रखे। वे भारत की परंपराओं से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, 'भारत विविधताओं से भरा देश है।' रोनाल्ड, देशभर में होने वाले मेले, धार्मिक आयोजनों आदि में जाकर लोगों की साइकोलॉजी पर स्टडी कर रहे हैं। वे ऐसे स्थानों में हेल्थ बेनिफिट्स पर भी स्टडी कर रहे हैं।