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डाउनलोड करेंभोपाल. सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त बच्चों की सर्जरी कराना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बच्चे की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ सकती है। भोपाल उत्सव मेले में सेरेब्रल पाल्सी के दो दिवसीय जांच शिविर में यह बात सामने आई है। यहां आने वाले 20 से ज्यादा बच्चे ऐसे थे, जो सर्जरी के बाद थोड़ा भी चल-फिर नहीं पा रहे थे। रविवार को 274 मरीजों की जांच हुई। इसके साथ ही दो दिनों में सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त 379 मरीज इस शिविर से लाभान्वित हुए।
इलाहाबाद के मशहूर सेरेब्रल पाल्सी विशेषज्ञ डॉ. जेके जैन ने बताया कि यहां सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त 10 प्रतिशत बच्चों को ही सर्जरी की जरूरत होती है। 7 साल से कम उम्र के बच्चों को तो सर्जरी कराना ही नहीं चाहिए। सामान्य तौर पर कराई जाने वाली कसरत भी नुकसानदायक हो सकती है। ज्यादा उम्र के लोगों की सर्जरी के लिए भी एक खास तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह जरूरी नहीं कि एक बच्चा जो कसरत कर रहा है, वही दूसरे के लिए फायदेमंद हो। इस बीमारी से पीडि़त मरीजों के लिए न्यूरो डेवलपमेंट थैरेपी, सेन्सरी इंटिग्रेशन और टोन रिड्यूसिंग थैरेपी का ही प्रयोग होता है। इन थैरेपी के लिए डॉक्टरों के साथ-साथ बच्चे के माता-पिता का ट्रेंड होना भी जरूरी है।
कम होने की बजाया बढ़ गई मुस्कान की तकलीफ
बैरागढ़ निवासी रीता वाधवानी की 10 वर्षीय बेटी मुस्कान बचपन से ही सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त है। एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने मुस्कान के पैर की सर्जरी की। ठीक होने के बजाय मुस्कान की हालत और खराब हो गई। रीता वाधवानी के मुताबिक, मुस्कान पहले सहारे से चल लेती थी, लेकिन अब उसका ऐसा करना भी बंद हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेरेब्रल पाल्सी से पीडि़त बच्चे सामान्य जूतों का वजन नहीं सह पाते। उनके लिए पॉली प्रोपाइलिन के हल्के जूतों का इस्तेमाल किया जाता है।
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