भोपाल. शहरों में विकास कार्यों को लेकर विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल न होने का मामला शनिवार को प्रशासन अकादमी में आयोजित मंथन कार्यक्रम में भी उठा। गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि पाइप लाइन या केबल डालने के लिए एजेंसियां सड़कें खोद देती हैं, लेकिन वापस सड़क नहीं बनती हैं, जिससे लोगों को परेशान होना पड़ता है।
उनका सुझाव था कि सड़क बनाने का काम नगर निगम के पास ही होना चाहिए। मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने शहरों में सड़कें बनाने का काम नगर निगम को सौंपा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि लेटलतीफी के कारण हमारे यहां फ्लाई ओवर बनने में तीन साल और सड़क बनाने में एक साल लग जाता है। अब ऐसे काम नहीं चलेगा। समयसीमा का पालन करना ही होगा।
ये आए सुझाव
कंपाउंडिंग राशि जमा कर सुपुर्द किए जाएं वाहन
मंथन में यह भी सुझाव आया कि विभिन्न अपराधों,एक्सीडेंट आदि में वाहन जब्त किए जाते हैं। यह वाहन थानों में ही कंडम हो जाते हैं। इसके लिए कानून में ऐसा प्रावधान होना चाहिए कि वाहन कंडम होने से बचे। ऐसे वाहनों को कंपाउंडिंग राशि जमा करवाकर सुपुर्द किया जा सके।
नेता, अफसर कराएं सरकारी अस्पतालों में इलाज
सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएं। ताकि लोगों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में न जाना पड़े। साथ ही इन अस्पतालों में नेता और अफसर भी अपना इलाज कराएं।
अंदर का शिवराज कहता है सही काम करो, बाहर का भटकाता है : सीएम
मुख्यमंत्री चौहान ने अफसरों के सामने पहली बार यह राज खोला कि उनकी कार्यशैली में दो शिवराज हैं। उन्होंने सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन करने और सुशासन को मजबूत करने के लिए आयोजित बैठक मंथन में कहा- मेरे भीतर दो शिवराज हैं।
एक शिवराज दिल और दिमाग से निर्णय लेने के लिए सही रास्ता दिखाता है, जबकि जो शिवराज दिखाई देता है, वह मन को भटकाता है। मुख्यमंत्री के कहने के पीछे मंशा अफसरों को सही काम करने के लिए प्रेरित करना था। उनका कहना था कि कोई भी निर्णय आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं तो प्रशासनिक क्षमता मजबूत होती है।