भोपाल. प्रदेश की अगले वित्तीय वर्ष 2015-16 की योजना 60 हजार करोड़ रुपए की होगी। इसमें खेती को लाभ का धंधा बनाने, सड़क, बिजली और नए उद्यमियों को प्रदेश में उद्योग लगाने और युवाओं को रोजगार के अवसर पैदा करने पर फोकस होगा।
इन क्षेत्रों में योजना की पचास प्रतिशत राशि खर्च किए जाने की संभावना है। राज्य योजना आयोग ने आगामी साल की प्लानिंग की प्रारंभिक रूपरेखा तैयार कर ली है। प्रदेश की इस साल की योजना 53 हजार करोड़ रुपए की है।
योजना की शुरुआती तैयारियों के अनुसार महिला सशक्तिकरण, कौशल उन्नयन, समावेशी विकास और सिंचाई क्षमता आगामी साल में एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ाने के लिए पर्याप्त राशि मुहैया कराए जाने पर जोर रहेगा।
इसके अलावा नए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने, मुख्यमंत्री युवा कांट्रेक्टर योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के लिए भी प्रावधान किया जा रहा है। राज्य योजना आयोग यह योजना अगले माह में सरकार को सौंपेगा।
जीएसटी की बकाया राशि मिलने के आसार
हाल ही में केंद्र के साथ बनी सहमति के बाद राज्य सरकार को जीएसटी की बकाया लगभग 500 करोड़ रुपए की राशि मिलने की भी उम्मीद है। इसके साथ ही प्रदेश से करों की अब तक राजस्व वसूली बीते साल की तुलना में 11 प्रतिशत ज्यादा है।
इसे देखते हुए सरकार ने आबकारी विभाग के राजस्व वसूली के टारगेट को रिवाइज कर दिया है। इसमें 130 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है। विभाग का वसूली लक्ष्य 6600 करोड़ रुपए निर्धारित किया था, जिसे बढ़ाकर 6730 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
राज्य की आगामी साल की योजना तय कर दी गई है। विभागों को योजना में बजट आवंटन का काम किया जाना बाकी है। इस दिशा में काम चल रहा है।
बीएल जैन, उपाध्यक्ष, राज्य योजना आयोग
ऐसा होगा वर्ष 2015-16 के बजट का खाका
प्रारंभिक योजना तय होने से प्रदेश के आगामी साल का बजट लगभग 1 लाख 30 हजार करोड़ रुपए का होना अनुमानित है। इसमें राज्य के करों की हिस्सेदारी करीब 40 हजार करोड़, केंद्रीय करों में प्रदेश की हिस्सेदारी 29 हजार करोड़ रुपए होगी।
इस तरह सरकार को राजस्व करों से 69 हजार करोड़ रुपए मिलना अनुमानित होगा। इसके अलावा नान टैक्स की राशि 8 हजार करोड़ रुपए और केंद्र से अनुदान की राशि 30 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है।