भोपाल. न तो नर्मदा प्रोजेक्ट से और न ही कोलार से पुराने शहर के कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई होती है। अधिकांश इलाकों में बड़े तालाब से पानी की सप्लाई होती भी है तो एक से दो दिन छोड़कर। ट्यूबवेल से भी पानी का संकट दूर नहीं हो पाता है। यह स्थिति तब है जबकि यहां से नर्मदा प्रोजेक्ट की पाइपलाइन गुजर रही है, लेकिन उसे इन वार्डों से कनेक्ट नहीं किया गया है।
लिहाजा, यहां स्मार्ट वार्ड बनाने के लिए सबसे पहले नगर निगम को रोजाना पानी की सप्लाई सुनिश्चित करनी होगी। वहीं, खाली जमीन का उपयोग खेल मैदान, लाइब्रेरी, मल्टीलेवल पार्किंग, हेल्थ सेंटर आदि बनाने में करना चाहिए। दैनिक भास्कर द्वारा "स्मार्ट वार्ड- स्मार्ट सिटी' विषय पर बुधवार को आयोजित रूबरू कार्यक्रम में ऐसे ही कई सुझाव लोगों ने दिए।
डीआईजी बंगला चौराहा स्थित चांदनी गार्डन में आयोजित कार्यक्रम में नागरिकों ने जनप्रतिनिधियों से वार्ड की समस्याअों को आगामी नगर निगम चुनाव के एजेंडे में शामिल करने की बात कही।
लोगों ने कहा कि यहां सीवेज एवं ड्रेनेज नेटवर्क बनाया जाना बेहद जरूरी है। ऐसा करने पर पूरे शहर को स्मार्ट सिटी में तब्दील किया जा सकता है। नागरिकों ने विकास को तरजीह दी, लेकिन पुराने शहर के साथ हो रहे भेदभाव के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया।
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