भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राजधानी सहित प्रदेश भर की पब्लिक लाइब्रेरी का आधुनिकीकरण छह सालों में भी नहीं हो पाया है। वर्ष 2009 में स्कूल शिक्षा विभाग ने स्टेट लाइब्रेरी नेटवर्क तैयार करने का निर्णय लिया था। इन छह सालों में विभाग एक भी जिला लाइब्रेरी को सेंट्रल लाइब्रेरी से नहीं जोड़ पाया है।
इस बीच विभाग ने पांचों सेंट्रल लाइब्रेरी की करीब तीन लाख किताबों का ऑटोमेशन ताे कर लिया है, लेकिन किताबों को सॉफ्टवेयर के माध्यम से इश्यू और रिटर्न करने की प्रकिया अभी तक शुरू नहीं हुई है। किताबों के ऑटोमेशन पर करोड़ों रुपए खर्च हाेनेे के बावजूद लाइब्रेरी हाईटेक नहीं हुई है।
ब्रिटिश काउंसिल ने छह साल पहले भाेपाल स्थित अपनी लाइब्रेरी को बंद कर दिया था। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी का आधुनिकीकरण कर इससे जिला स्तर की सभी 37 लाइब्रेरी को जोड़ने का फैसला लिया था। इन लाइब्रेरी के सदस्यों को स्मार्ट कार्ड भी देने का प्रस्ताव था, इसके अंतर्गत उन्हें किसी भी लाइब्रेरी का उपयोग करने की सुविधा मिलनी थी।
आधुनिकीकरण के लिए हर साल 96 लाख तक का बजट तय
लाइब्रेरी के आधुनिकीकरण के लिए शासन द्वारा करीब 96 लाख का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन इन छह सालों में विभाग केवल लाइब्रेरी की किताबों का ऑटोमेशन ही कर पाया है। किताबें न तो सॉफ्टवेयर के माध्यम से इश्यू और रिटर्न की जा रही हैं और न ही सदस्यों के लिए स्मार्ट कार्ड ही बनवाए जा सके हैं। ऑनलाइन किताबें सर्च करने के लिए ओपेक की भी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।