भोपाल. बीते दिनों भारतीय सिंधु सभा की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें सिंधी समाज की विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर रणनीत तैयार की गई। दरअसल सिंधी समाज सामाजिक कुरीतियों, विस्थापन के साठ दशक से अधिक समय होने के बाद भी अपनी समस्याओं का निराकरण न होने पर अब लामबंद होकर निर्णायक संगठित मूवमेंट की तैयारी में हैं।
इसका नेतृत्व राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर भारतीय सिंधु सभा कर रही है। प्रदेश स्तर पर संगठन की कमान युवा नेता भगवानदास सबनानी के हाथ में है। संगठन की आगे की रणनीति पर भास्कर संवाददाता ने सबनानी से बातचीत की।
सबनानी ने बताया कि भारतीय सिंधु सभा सेवा, संस्कार को आधार बनाकर सक्रिय है। प्रदेश में इसकी 80 शाखाएं हैं, 22 युवा एवं 13 महिला इकाइयां सिंधियत की आवाज को बुलंद कर रही हैं। सभा की गतिविधियां सामाजिक, रचनात्मक, सांस्कृतिक सोच के साथ संचालित हो रही हैं। सामाजिक कुरीतियों से समाज को छुटकारा दिलाना सभा का पहला दायित्व है।
समस्याओं के लिए संघर्ष
सबनानी ने कहा यह विडंबना ही है कि भारत पाक विभाजन के बाद भारत आए सिंधी विस्थापितों को साठ दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी शासन स्तर पर समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पट्टों की समस्या, नागरिकता एवं उनके बच्चों की पढ़ाई में परेशानियां आ रही हैं। प्रदेश में सरकारी स्तर पर सिंधी कल्याण समिति बनी, लेकिन उसकी सिफारिशों का लाभ समाज को नहीं मिल पाया।
समाज की समग्र चिंता
सभा का उद्देश्य समाज के ऊपर से नीचे तक के व्यक्ति की चिंता एवं उनकी समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका है। समाज के कमजोर बच्चों को शिक्षा, बुजुर्गों के स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं युवा पीढ़ी को समाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना एवं जन जागरण अभियान चलाना है।
सामाजिक सरोकार
सभा ने तय किया है कि केवल समस्याओं के लिए सक्रियता ही नहीं, बल्कि खुद को सामजिक सरोकार और सिंधी परंपरा से जोड़े रखना है, जिससे आने वाली पीढ़ी तक सिंधियत पहुंच सके। सभा अमर शहीद कालानी, सिंधी के अंतिम सम्राट राजा दाहिर सेन, संत कंवरराम जी व अन्य महापुरुषों को याद कर उनकी जानकारी पहुंचाने का काम कर रही है। सिंधी समाज की प्रतिभाओं को मंच देने और होनहार विद्यार्थियों का सम्मानित कर प्रोत्साहित करने काम भी सभा कर रही हैं। रक्तदान, स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाते हैं।
सिंधियत संस्कृति से जुड़ाव
सिंधी समाज से जुड़े पर्व एवं त्योहारों को समाज के साथ मानने की परंपरा सभा की है। भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेट्रीचंड महोत्सव, सिंधी भाषा दिवस, सिंधी स्मृति दिवस, लाललोई पर्व, तिजड़ी पर्व सभा मनाती है।
बढ़ेगा नेटवर्क
सबनानी ने बताया सभा अपना नेटवर्क राष्ट्र, प्रदेश के बाद कस्बे तक सघन कर रही है। रतलाम में हुई प्रांतीय बैठक में तय किया गया है, जहां भी समाज के 25 परिवार हैं, वहां शाखा का गठन होगा। संगठन की सक्रियता की समीक्षा में निरंतरता निगरानी सुनिश्चित की गई है।