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बेटे-बेटी, बहन-भाई के बीच संपत्ति के बंटवारे पर स्टाम्प ड्यूटी घटाई

7 वर्ष पहले
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भोपाल. परिवार के बीच बंटवारे पर लगने वाले स्टाम्प शुल्क की दर पांच फीसदी से घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही परिवार के बाहर इस ड्यूटी को एक फीसदी बढ़ा दिया गया है। गुरुवार को विधानसभा में भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक 2014 पारित हो गया। परिवार के दायरे में बेटे-बेटी, भाई-बहन, माता-पिता, पत्नी-पति या नाती-पोते और नातिन-पोती को सम्मिलित किया गया है। इसी तरह परिवार के सदस्यों के बीच गिफ्ट की जाने वाली चीजों (संपत्ति समेत) पर स्टाम्प ड्यूटी आधी कर दी गई है। पहले यह पांच फीसदी लगती थी।
विधानसभा में स्टाम्प विधेयक के साथ रजिस्ट्रीकरण (मप्र संशोधन) विधेयक 2014 और मप्र वेट (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2014 भी चर्चा के बाद पारित हुए। स्टाम्प से जुड़े विधेयक में लीज नवीनीकरण के लिए स्टाम्प ड्यूटी पुरानी कीमत पर देना तय किया है। यानी पुरानी कीमत को ही बाजार मूल्य माना जाएगा।
फ्रेंचाइज एग्रीमेंट पर भी शुल्क की दर को 25 हजार घटाकर 10 हजार रुपए कर दिया गया है। इससे संशोधन से मल्टीनेशनल कंपनियों के आउटलेट लेने या ब्रांड का उपयोग करने या नामी कोचिंग संस्थान की फ्रेंचाइज लेने वालों को लाभ होगा। रजिस्ट्रीकरण (मप्र संशोधन) विधेयक 2014 में अब गोद ली गई बेटी का भी पंजीयन होगा।
गोद ली गई बेटी का भी पंजीयन होगा
पूर्व में पंजीयन की धारा 17(3) में सिर्फ पुत्र के गोद लेकर पंजीयन का प्रावधान था। इस ‘पुत्र’ शब्द के स्थान पर अब ‘संतान’ शब्द लिखा जाएगा। इसके अलावा संपत्ति की रजिस्ट्री में संपत्ति का मानचित्र व फोटो अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही पहले खरीदने और बेचने वाले के ही फोटो व अंगूठे के निशान लेने का प्रावधान था।
इसमें संशोधन कर दिया गया है। अब अचल संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण से जुड़े दस्तावेजों में निष्पादक (एग्जेक्यूटेंट) तथा दावेदार (क्लेमेंट) के फोटो व अंगूठे के निशान के साथ हस्ताक्षर भी लिए जाएंगे।
डिटेल नहीं देने वाले व्यापारियों पर 50 हजार पेनाल्टी
वैट (द्वितीय संशोधन) विधेयक को लेकर वित्तमंत्री जयंत मलैया ने बताया कि अब पंजीकृत व्यापारी खरीदी व बिक्री की जानकारी (डिटेल) नहीं देगा तो उसे 50 हजार रुपए बतौर पेनाल्टी देनी पड़ेगी। पहले यह राशि 10 हजार रुपए थी।
वाणिज्यिक कर विशेषज्ञ एस कृष्णन के मुताबिक यह प्रावधान नया है। मलैया ने जानकारी दी कि रिटर्न में देरी पर पहले 30 दिन तक पेनाल्टी 50 रुपए प्रतिदिन, इसके बाद 1000 रुपए प्रतिदिन जो अधिकतम 50 हजार रुपए तक होगी।