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भाजपा मंडल अध्यक्ष व महामंत्रियों को राष्ट्रीय संगठन महामंत्री ने दी नसीहत

9 वर्ष पहले
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भोपाल। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने पार्टी के मंडल अध्यक्षों और महामंत्रियों को नसीहत दी कि मप्र में भाजपा कुशाभाऊ ठाकरे का खानदान है, खानदान की इज्जत को ध्यान में रखकर आचरण बरतें और काम करें। उन्होंने कहा कि मप्र में चुनावी युद्धकाल शुरू हो गया है, टाइम टेबल बनाकर काम में जुट जाएं, एक भी दिन व्यर्थ नहीं गंवाना है।


राजधानी के स्वराज उद्यान में मंगलवार को भाजपा मंडल अध्यक्षों, महामंत्रियों के प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का उदघाटन करते हुए रामलाल ने कई चुनावी नारे दिए 'सुशासन और संकल्प, भाजपा ही विकल्पÓ। 'कांग्रेस के तीन यार, घोटाला और महंगाई और भ्रष्टाचार। उन्होंने कहा कि मप्र में सत्ता और संगठन में बेहतर तालमेल है। कांग्रेस और यूपीए से लोग निराश हैं। अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री के राज में देश की अर्थव्यवस्था खराब है, नौ साल में नौ बड़े घोटाले हुए हैं। रामलाल ने कहा कि महंगाई में यूपीए और एनडीए की तुलना करके बताना है कि एनडीए के जमाने में महंगाई नहीं थी, विकास था। उन्होंने कहा कि यूपीए के राज में जातिवाद और अल्पसंख्यक, बहुसंख्यक वाद के नाम पर देश को बांटने की कोशिशें हो रही हैं। गृह मंत्री सुशील शिंदे ने बहुसंख्यक समाज को ही आतंकवाद से जोड़ दिया। इस टिप्पणी के खिलाफ भाजपा बुधवार को दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है।


प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि महा जनसंपर्क अभियान में यूपीए सरकार की विफलताओं को जनता के बीच बताएं और राज्य सरकार की उपलब्धियां गिनाएं। शिवराज सरकार ने समाज के वर्ग की चिंता की है।


बिना कॉमा, फुलस्टॉप के होता है शिवराज का भाषण
रामलाल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपलब्धियों की तारीफ में कहा कि वे अंत्योदय के प्रतीक हैं। चुटकी लेते हुए कहा कि शिवराज का भाषण बिना कॉमा, फुलस्टॉप के होता है। दरअसल उनकी सरकार में इतने काम हुए हैं कि बताते समय कॉमा फुल स्टॉप का वक्तही नहीं रहता।

दूसरी तरफ यूपीए सरकार के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास निर्णय लेने का अधिकार नहीं हैं, घटक दल भी उनकी नहीं सुनते।

रामलाल ने ये टिप्स भी दिए

  • कार्यकर्ता संतुष्ट और उत्साहित रहना चाहिए। संतुष्टि का मतलब पद नहीं है। समस्याओं का समाधान, जिससे जनता में विश्वास बढ़े। जनता को ये न लगे कि हम उनके लिए नहीं खुद के लिए काम कर रहे हैं।
  • जनता से सीधा संपर्क बनाएं, उनकी बात सुनें, समस्याएं हल करें। जो हल न कर पाएं, उसकी दिक्कतें भी बताएं और आग्रह करें कि चुनाव में हमारी मदद करें।
  • चुनाव युद्ध है और आप लोग जनरल नहीं तो कर्नल और मेजर तो हैं ही।
  • बूथ लेवल एजेंटों की नियुक्ति करें। यही मंत्र है बूथ जीता तो चुनाव जीता, गांव जीता तो चुनाव जीता।