पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मेरिट लिस्ट में नाम आने पर भी स्कॉलरशिप के लिए भटक रहे छात्र

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भोपाल. संतनगर के शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा बारहवीं का छात्र सचिन कुमार विश्वकर्मा स्कॉलरशिप के लिए यहां-वहां भटक रहा है। सचिन को सन् 2010 में कक्षा आठवीं की मेरिट लिस्ट में नाम आने पर स्कॉलरशिप के लिए चयनित किया गया था, जिसके बाद से सचिन को अब तक सिर्फ आधी छात्रवृत्ति ही मिल पाई है। समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिलने के चलते दो बार कलेक्टर की जनसुनवाई में भी शिकायतें की जा चुकी हैं।
वार्ड चार के बेहटा गांव स्थित संजय नगर कॉलोनी में रहने वाले सचिन के पिता रतनलाल ने
बताया कि राष्ट्रीय मीन्स कम मैरिट योजना के अंतर्गत वर्ष 2010 में सचिन की छात्रवृत्ति स्वीकृत हुई थी। प्रतिमाह 500 रुपए के हिसाब से 12 माह के कुल 6 हजार रुपए एक साल में मिलने थे। जो कि कक्षा बारहवीं तक हर साल के लिए तय की गई थी। लेकिन वर्ष 2012 तक सचिन को किसी तरह की राशि नहीं दी गई।
लते 30 अप्रैल 2012 को छात्र के पिता रतनलाल ने कलेक्टर कार्यालय जाकर जनसुनवाई में शिकायत की। कलेक्टर ने शिकायत को गंभीर बताते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर जांच कर परीक्षण के बाद 7 दिन में निराकरण करें। जिसके बाद सचिन को उसके बैंक खाते में 12 हजार रुपए की राशि अलग-अलग किश्तों में दो साल की स्कॉलरशिप जमा करा दी गई।
स्वयं जांच करने के दिए निर्देश
वर्ष 2012 के बाद 2014 तक की स्कॉलरशिप नहीं मिलने के चलते एक बार फिर छात्र के पिता
रतनलाल ने हालही में 10 सितंबर को कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत की है। इस बार भी कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि स्कॉलरशिप की आधी राशि मिलने के बाद आधी क्यों रोकी गई है, इसके लिए वे स्वयं जांच करें।
और भी है जो भटक रहे हैं
समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने की शिकायत अकेले सचिन की नहीं है, बल्कि उनके साथ पढ़ने वाले विवेक विश्वकर्मा सहित अन्य छात्रों की भी हैं। स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को सबसे अधिक दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं। ऐसे कई विद्यार्थी लंबे समय से स्कॉलरशिप नहीं मिलने के चलते परेशान हैं। विद्यार्थियांे की मांग है कि इस दिशा में उिचत कदम उठाएं जाएं। ताकि उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिल सके और वे अपनी पढ़ाई ठीक से कर पाएं।