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स्वाइन फ्लू : डेथ रिव्यू रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, मरने वालों में 43% युवा

7 वर्ष पहले
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भोपाल. वैसे तो सरकार ने युवाओं को स्वाइन फ्लू के संक्रमण के लिए हाई रिस्क पेशेंट की लिस्ट से बाहर रखा है, लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है। राजधानी समेत पूरे प्रदेश में स्वाइन फ्लू से मरने वालों में 43 फीसदी युवा हैं। इनकी उम्र 16 से 40 साल के बीच है। यह खुलासा स्वाइन फ्लू कंट्रोल रूम की डेथ एनालिसिस रिपोर्ट में हुआ है। रिपाेर्ट के मुताबिक युवाओं को स्वाइन फ्लू का संक्रमण होने की वजह बीमारी के संक्रमण की शुरुआत में उसे अनदेखा करना है।
कंट्रोल रूम के अफसरों ने बताया कि स्वाइन फ्लू के संक्रमण को लेकर राजधानी और पूरे प्रदेश के युवा जागरूक हैं, लेकिन वे सर्दी, खांसी और बुखार को सामान्य बीमारी मानते हैं। इसके चलते प्रदेश में 104 युवाओं को स्वाइन फ्लू के वायरस एच1एन1 का संक्रमण हो गया। संबंधित व्यक्ति जब तक बीमारी की गंभीरता को समझते, तब तक उनके फेफड़ों में संक्रमण काफी बढ़ चुका था। यही कारण रहा कि युवाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने के बावजूद डॉक्टर उन्हें नहीं बचा सके।
सर्दी-खांसी को मामूली मानते रहे, इलाज में देरी की
केस-एक
6 दिन बाद सुध ली

होशंगाबाद रोड निवासी 35 साल की स्मिता ठाकुर (परिवर्तित नाम) की फरवरी के दूसरे हफ्ते में पीपुल्स हॉस्पिटल में मौत हो गई। स्मिता एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं। रिपोर्ट के मुताबिक स्मिता सर्दी-खांसी व बुखार की शिकायत होने के 6 दिन बाद अस्पताल में भर्ती हुई थी। उनकी स्वाइन फ्लू जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी।
केस-दो
शुरू में ही पता चल गया था

नेशनल अस्पताल में फरवरी के पहले सप्ताह में अरेरा कॉलोनी निवासी संजय पाठक (22- परिवर्तित नाम) सर्दी खांसी की शिकायत के बाद भर्ती हुए थे। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद संजय को स्वाइन फ्लू का संदिग्ध मरीज मानकर इलाज किया। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही संजय की मौत हो गई।
केस-तीन
फिर भी पचमढ़ी घूमने गए

कोलार रोड निवासी 28 वर्षीय रामेंद्र शुक्ला (परिवर्तित नाम) की एलबीएस अस्पताल में स्वाइन फ्लू के इलाज के दौरान मौत हो गई। वे स्वाइन फ्लू का संक्रमण होने के पांच दिन बाद इलाज के लिए भर्ती हुए थे। रामेंद्र ने डॉक्टरों को डिसीज हिस्ट्री में सर्दी-खांसी होने बाद भी पचमढ़ी घूमने जाने की जानकारी दी थी।
शहरी इलाकों में ज्यादा कहर
रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी समेत पूरे प्रदेश में स्वाइन फ्लू से शहरी क्षेत्र में 171 मरीजों की मृत्यु हुई है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 68 लोगों की जान गई है। यह स्थिति तब है जबकि स्वाइन फ्लू के संक्रमण को काबू करने राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चला रही है।
भोपाल में दो और मरीजों की मौत
राजधानी में सोमवार को अलग-अलग अस्पतालों में स्वाइन फ्लू से दो मरीजों की मौत हो गई। इससे यहां स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 70 हो गई है। वहीं 37 नए संदिग्ध मरीज मिले हैं। इनके नमूने जांच के लिए एम्स भेजा गया है। जांच रिपोर्ट बुधवार को आएगी।
04 गंभीर गलतियां
- सर्दी-खांसी और बुखार आने पर नजदीक के अस्पताल में इलाज कराने की जगह सीधे मेडिकल स्टोर से दवा ली।
- सर्दी - खांसी होने के बाद भी भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाना बंद नहीं किया।
- संक्रमण से बचने के लिए मुंह पर मास्क नहीं लगाया।
- संक्रमण होने के 4-6 दिन बाद नजदीक के अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे।
(स्रोत : स्वाइन फ्लू कंट्रोल रूम)