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यूनियन कार्बाइड: जीओएम को दें जर्मन कंपनी से होने वाले एग्रीमेंट का ड्राफ्ट

9 वर्ष पहले
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नई दिल्ली/भोपाल. भोपाल के जहरीले कचरे को नष्ट करने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए शुक्रवार को कहा कि केंद्र व राज्य सरकार इस मसले में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। शीर्ष कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि कचरा हटाने के लिए एग्रीमेंट का जो प्रारूप जर्मन कंपनी ने भेजा है, वह ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) को दिया जाए। जस्टिस जीएस सिंघवी की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने यह भी कहा है कि जीओएम जो भी निर्णय लेता है, राज्य सरकार उसका पालन करे। अगली सुनवाई 3 सप्ताह बाद होगी।



केंद्रीय पर्यावरण सचिव की याचिका पर कचरे का निपटान पीथमपुर में कराने संबंधी सुप्रीम कोर्ट से हुए आदेश की समीक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार हर बार समय मांगती हैं जो इस मामले के निराकरण में टालमटोल का रवैया दर्शाती है। मामले में मप्र सरकार की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट सीडी सिंह ने बताया कचरे के निपटान के लिए आगे आई जर्मन कंपनी के एग्रीमेंट के कुछ बिंदु राज्य सरकार को मंजूर नहीं है।



कचरा निपटान के संबंध में जर्मन कंपनी के साथ एमओयू करने से पहले सरकार कुछ संशोधन चाहती है। राज्य सरकार ने जर्मन कंपनी से कहा कि वह तंजानिया और नेपाल में उसके द्वारा किए गए कचरे के निपटान के रेट दे। इस मामले को जर्मन कंपनी ने गोपनीय बताकर जानकारी नहीं दी है। सीडी सिंह ने बताया कि इसके लिए राज्य सरकार भोपाल गैस त्रासदी पर गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (जीओएम) को जर्मन कंपनी द्वारा भेजे गए एग्रीमेंट के ड्राफ्ट की कॉपी सौंपेगी।



ऐसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला



यूनियन कार्बाइड कारखाना परिसर में रखे जहरीले कचरे के निपटान के मामले में भोपाल के आलोक प्रताप सिंह ने एक याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। आलोक प्रताप सिंह के मुताबिक याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन पर्यावरण मंत्रालय के सचिव द्वारा नहीं करने पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के आधार पर केंद्रीय पर्यावरण सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर, कचरे का निपटान पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में कराने के आदेश कोर्ट से कराए थे।



सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के विरुद्ध मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन लगाई है। इस पिटीशन पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद जस्टिस जीएस सिंघवी की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि केंद्र और राज्य की सरकार कचरा निपटान में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं।



जर्मन कंपनी की इन शर्तो पर सरकार असहमत



1. यूनियन कार्बाइड कारखाने में रखे कचरे के निपटान के दौरान अप्रिय घटना घटने पर जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।



2. कचरा निपटान के लिए हुए एग्रीमेंट के बाद हुए किसी भी विवाद का निराकरण जर्मनी की कोर्ट में होगा।



3. जर्मन कंपनी ने यूका कचरे के निपटान से पहले जिन देशों में जहरीले कचरे को नष्ट किया है, वहां कचरा निपटान की दरों का ब्योरा कंपनी दे। ताकि कचरा निपटान की दर तय की जा सके।



नोट : सरकार की आपत्तियां आलोक प्रताप सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले एडवोकेट मनीष प्रताप सिंह चौहान और नमन नागरथ के मुताबिक।



यूका परिसर में रखे जहरीले कचरे के निपटान को लेकर अभी जर्मन कंपनी से एमओयू नहीं हुआ है। जब अनुबंध होगा, उस वक्त ही बता सकेंगे कि कंपनी की कौन-कौन सी शर्तें सरकार को मंजूर नहीं हैं। - बाबूलाल गौर, मंत्री, भोपाल गैस त्रासदी, राहत एवं पुनर्वास



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