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रिश्ते जोड़ने के लिए ले रहे जासूसों की मदद, कई हाई प्रोफाइल लोग शामिल

6 वर्ष पहले
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भोपाल. अभी तक शादी के रिश्ते जोड़ने से पहले रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से लड़का-लड़की और उनके परिवारों के बारे में जानकारी लेने (प्री मेट्रिमोनियल इन्वेस्टिगेशन) का चलन रहा है। लेकिन राजधानी में अब नया ट्रेंड शुरू हुआ है। कई परिवार बच्चों की शादीशुदा जिंदगी को सिक्योर करने के लिए जासूसी करने वाली एजेंसियों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे परिवारों में राजनेता, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस अफसर जैसे हाई प्रोफाइल लोग भी शामिल हैं।
एक डिटेक्टिव एजेंसी के प्रतिनिधि ने बताया कि केवल भोपाल में ही वे 106 क्लाइंट के लिए प्री मेट्रिमोनियल इन्वेस्टिगेशन कर रहे हैं। उनकी एजेंसी एक साल में तकरीबन 400 इन्वेस्टिगेशन करती है।

ये एजेंसियां एक क्लाइंट से 10 से 30 हजार रुपए तक फीस लेती हैं। लड़का-लड़की के विदेश में सैटल होने पर फीस बढ़ जाती है। तकरीबन एक महीने में क्लाइंट को संबंधित परिवार की सारी जानकारी उपलब्ध करा दी जाती है।
वेट्रन इन्वेस्टिगेशन सर्विस के सीनियर एसोसिएट राहुल राय ने बताया कि भोपाल सहित देशभर में उनकी 76 ब्रांच हैं। वहीं डॉल्फिन डिटेक्टिव एजेंसी के डायरेक्टर बालाजी बिरदार के मुताबिक सभी एजेंसियां क्लाइंट द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराती हैं। जानकारी से संतुष्ट हुए तो वे बात आगे बढ़ाते हैं, नहीं तो रिश्ते की बात ही नहीं करते हैं।
जासूसी से पता चला सच
केस-1 भोपाल के एक आईपीएस अफसर ने अपनी बेटी की शादी करने से पहले तीन लड़कोंं के परिवार की जासूसी कराई। जासूस ने तीनों लड़कों और उनके परिवार की जानकारी लाकर दी। इसके बाद उन्होंने उनमें से एक लड़के को चुनकर दिसंबर 2014 में बेटी की शादी कर दी।
केस-2 शाहपुरा निवासी एयर होस्टेस सुजल की शादी खुद को व्यवसायी बताने वाले जयपुर निवासी महेश मीणा से होनी थी। दोनों में प्रेम प्रसंग था। फिर भी सुजल के चाचा ने पड़ताल कराई तो पता चला कि महेश ने अपने विषय में सबकुछ झूठ बोला था। सारा व्यवसाय उसके दोस्त का था।
केस-3 अरेरा कॉलोनी निवासी अलका श्रीवास्तव की शादी अमित श्रीवास्तव से हुई थी। अमित की दो शादी पहले ही टूट चुकी थीं, जिसकी जानकारी शादी के बाद लगी। मामला तलाक तक पहुंच गया। इसके बाद उनके परिवार ने अन्य शादियों से पहले डिटेक्टिव एजेंसी का सहारा लिया है।
ऐसे करते हैं इन्वेस्टिगेशन
वेट्रन इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के राहुल ने बताया कि प्री मेट्रिमोनियल इन्वेस्टिगेशन के लिए क्लाइंट से मेट्रिमोनियल साइट पर दी गई लड़का-लड़की की जानकारी ली जाती है या फिर क्लाइंट उस परिवार का पता और लड़का-लड़की की फोटो देता है, जिससे वे अपने बेटा-बेटी की शादी करना चाहते हैं। इसके बाद इन्वेस्टिगेशन शुरू की जाती है।
इसमें संबंधित परिवार का सोशल स्टेटस, फैमिली बैकग्राउंड, एजुकेशनल डिटेल, क्रिमिनल रिकाॅर्ड, इनकम और फाइनेंशियल पोजीशन, पिछले 10 साल का एम्प्लायमेंट रिकाॅर्ड, लड़का-लड़की और उसके परिवार के लोगों की बैड हैबिट, पर्सनल डिटेल जिसमें लड़का या लड़की की पूर्व शादी और अफेयर्स सहित अन्य डिटेल निकाली जाती है।