छतरपुर. छतरपुर में टाइगर के रेस्क्यू का मामला सामने आया है जहाँ 10 घंटे की भारी मसक्कत के बाद टाइगर को ट्रीन्कुलाईज कर काबू में किया गया और पिंजड़े में डाल कर टाईगर रिजर्व ले जाया गया जहा उसे जंगलों में छोड़ दिया गया।
मामला छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के चंद्रनगर वन रेंज के चुरारन गाँव का है जहाँ रनगुवां बाँध की मैंन कैनाल (नहर) के पास बफर जॉन का है जहाँ चोपरा के खेत में बानी 'बहर' में पानी पीने गए बैल को पहले से घात लगाये टाइगर ने दबोच लिया और उसका शिकार कर अपना भोजन बना लिया, बैल के रंभाने (चीखने) की आवाज सुनकर खेत में लेटा किशान पहुंचा तो नजारा देख कर हतप्रभ रह गया और वहां से गाँव की ओर भागा और लोगों को बताया और लोगों ने वन अमले को सुचना दी मामले की जानकारी लगते ही वन अमला सुबह से मौके पर पहुँच गया जहाँ टाइगर अपने शिकार को खा रहा था।
पन्ना नेशनल पार्क की सीमा को पार कर टाइगर आवासीय क्षेत्र में चला आया था जहाँ उसने शिकार किया वन अमले ने 10 घंटे की भारी मसक्कत के बाद उसे ट्रीन्कुलाईज कर पकड़ा और तत्काल इलाज के बाद पिंजड़े में बंद कर पन्ना टाइगर रिजर्व ले गए।
टाइगर रिजर्व के अधिकारीयों की मानें तो यह टाइगर 17 माह की फीमेल बच्चा है जो कि मादा टाईगर T-4 की संतान है जिसने कुछ दिनों पहले 3 बच्चों को जन्म दिया था यह उन्हीं तीन बच्चों में से एक है जबकि इनकी माँ कुछ दिनों पहले मर चुकी है, इस टाईगर के बच्चे की माँ न होने के कारण यह भटक गया था जिसके चलते यह नदी पर कर टाइगर रिजर्व की सीमा से निकल आवासीय क्षेत्र में आ गया और भूख के कारण यह खेत में बने जल श्रोत (बहर/बाबड़ी) के पास बैठ गया होगा और जैसे ही बैल पानी पीने आया और उसने शिकार कर लिया, हालांकि अब बाघ को पकड़ लिया गया है इससे अब कोई भय की बात नहीं बाघ के पड़े जाने के बाद टाइगर औरमानव दोनों की जान सुरक्षित है।