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राजधानी के आसपास बढ़ा बाघों का कुनबा, तीन शावकों के साथ घूम रही बाघिन

9 वर्ष पहले
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भोपाल । प्रदेश में शिकार की बढ़ती घटनाओं के चलते भले ही संरक्षित क्षेत्र में बाघों की संख्या कम हो रही हो, लेकिन राजधानी के नजदीक असंरक्षित क्षेत्र में लगातार बाघों की संख्या बढ़ रही है। भोपाल से 15 किमी दूर जंगल में एक बाघिन अपने तीन शावकों के साथ दिखाई दे रही है। इस बाघिन की सुरक्षा के लिए एक नया गश्ती दल बनाया गया है। इन शावकों के आने से अब समरधा रेंज और कठोतिया वन परिक्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।

रातापानी अभयारण्य में वर्ष 2010-11 में बाघों की संख्या केवल 16 थी। रातापानी अभयारण्य से जुड़े कलियासोत, केरवा, कठोतिया, समरधा में बाघों के लिए अनुकूल जंगल और पर्याप्त भोजन उपलब्ध होने की वजह से यहां पर बाघों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। वर्ष 2010 अक्टूबर में एक बाघ ने कलियासोत-केरवा की ओर रुख किया था। उसके बाद यहां पर एक बाघिन ने डेरा डाला। उसके बाद से समरधा रेंज में बाघों का कुनबा बढ़ रहा है। फरवरी 2011 में बाघिन ने दो शावकों को जन्म दिया। बाघों के लिए गश्त कर रहे दल का कहना है कि भोपाल से 10 से 15 किमी की दूरी पर ही 10 बाघ विचरण कर रहे हैं। इसमें तीन तो कलियासोत से लेकर केरवा क्षेत्र में है।

भोपाल वन मंडल कंजरवेटर एल कृष्णमूर्ति का कहना है कि बाघिन और उसके शावकों की निगरानी के निर्देश दे दिए हैं। उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की है कि यह नई बाघिन है जिसने बच्चों की सुरक्षा के लिए यह इलाका चुना है।


कहां कितने बाघ
केरवा-कलियासोत 3
कठोतिया परिक्षेत्र 4
समरधा परिक्षेत्र 7
रातापानी में बाघों की संख्या 25

बाघों की सुरक्षा के लिए बढ़े बल व बजट : भोपाल के समरधा रेंज में बढ़ रही बाघों की संख्या को देखते हुए वन्य प्राणी प्रेमियों ने क्षेत्र को संरक्षित घोषित करने की मांग की है। प्रयत्न संस्था के अजय दुबे का कहना है कि वन विभाग को इस बात पर विचार करना चाहिए कि संरक्षित क्षेत्रों के बाघों की संख्या लगातार क्यों कम हो रही है।

वहीं असंरक्षित क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ रही है। उनका कहना है कि विभाग को पिछले हादसों से सबक लेते हुए वन विभाग को इस क्षेत्र के लिए अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराया जाए। अन्य वन्य प्राणी प्रेमी प्रलय बागची का कहना है कि क्षेत्र में बाघों की गश्त के लिए अलग से विंग बनाया जाए ताकि बाघ सुरक्षित रह सकें।