गुना. यूरिया खाद नहीं मिलने से परेशान किसान उग्र होते जा रहे हैं। शनिवार को किसानों ने सोसायटी के ट्रक से यूरिया की 150 बोरी लूट ली। राघौगढ़ तहसील के विजयपुर स्थित एनएफएल की मालगाड़ी रोक लिया। मुरैना में किसानों ने थाने पर पथराव किया और बाजार बंद कराए। सीहोर, ग्वालियर जिले में भी कुछ ऐसे ही हालात है।
राघौगढ़ ब्लॉक की मधुसूदनगढ़ तहसील के बारोद गांव स्थित सहकारी सोसायटी में सुबह 11 बजे किसानों को दो ट्रकों से यूरिया बांटी जा रही थी। अभी 150 बोरियां बंटी ही थीं कि तभी कुछ समय के लिए वितरण बंद कर दिया गया। इससे आक्रोशित किसान सोसायटी प्रबंधक पर कालाबाजारी का आरोप लगाने लगे।
वितरण दोबारा शुरू नहीं होने से करीब 800 किसानों ने समिति में खड़े एक ट्रक से यूरिया लूटना शुरू कर दिया। आनन फानन में ट्रक ड्राइवर ने दूसरा ट्रक निकाला। समिति प्रबंधक विनोद रैकवार ने मधुसूदनगढ़ थाने में इस मामले में केस दर्ज कराया है।
मुरैना थाने में पथराव : मुरैना जिले के सबलगढ़ में शनिवार को खाद का स्टॉक समाप्त होने से किसानों को पर्चियों का वितरण नहीं किया गया। इससे पुलिस थाने में मौजूद सैकड़ों किसानों ने पथराव किया। इसके बाद वे बाजार बंद कराने निकल गए। किसानों के उग्र तेवर देख व्यापारियों ने अपने-अपने प्रतिष्ठानों के शटर नीचे गिरा दिए।
जरूरत के अनुसार मिलती रहेगी यूरिया - चौहान : मुख्यमंत्री
शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों को जितनी जरूरत होगी उतनी यूरिया उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रदेश में ऐसा कोई भी किसान नहीं रहेगा जिसको उर्वरक नहीं मिले। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि खाद उठाने में अनावश्यक जल्दबाजी नहीं करें। जितनी जरूरत हो उतना ही लें।
खाद से भरी मालगाड़ी वापस
यूरिया को लेकर सुबह 8 बजे सैकड़ों किसान राघौगढ़ तहसील के विजयपुर स्थित यूरिया संयंत्र पर पहुंचे और मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसान रेलवे लाइन पर लेट गए और संयंत्र से यूरिया लेकर उप्र और बिहार जा रही मालगाड़ी को दो घंटे तक रोके रखा। गेट के दूसरी तरफ यूरिया भरने आई मालगाड़ी भी अंदर नहीं जा पाई। इसके बाद यूरिया भरकर गेट पर खड़ी मालगाड़ी को रिटर्न किया गया।
सोसाइटी पहुंचने से पहले ही ट्रक खाली
सीहोर जिले के नसरुल्लागंज में खाद के लिए लूट मची है। हालात यह है कि नसरुल्लागंज गोडाऊन से चीच, नीलंकठ जाने वाले ट्रकों से किसान रास्ते में खाद की बोरियां उतरवा ले रहे हैं। वरिष्ठ कृषि अधिकारी लक्ष्मीनारायण विश्वकर्मा ने बताया कि यहां खाद का कोटा 8000 मैट्रिक टन है जबकि हमें 2500 मैट्रिक टन ही आवंटित किया गया है। इसलिए ऐसे हालात बन रहे हैं।