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नए न्यू मार्केट के साथ फिर से बसेगा टीटी नगर, कैबिनेट की हरी झंडी

6 वर्ष पहले
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भोपाल. चार साल की लंबी कवायद के बाद आखिरकार भोपाल के सबसे बड़े टीटी नगर री-डेंसीफिकेशन प्रोजेक्ट को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। यह मंजूरी कुछ संशोधनों के साथ मिली है। इसके तहत अब इस प्रोजेक्ट में न्यू मार्केट की पार्किंग व्यवस्था और हाट बाजार के लिए अतिरिक्त जमीन का प्रावधान किया गया है।
साथ ही सरकारी मकानों की संख्या 3,478 से बढ़ाकर 4,284 कर दी गई है। इस बदलाव से कुल 77 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले प्रोजेक्ट की लागत में अब 40 फीसदी का इजाफा हो गया है। कुल लागत 1200 करोड़ रुपए की बजाय 1,704 करोड़ रुपए हो गई है।
संशोधन की वजह से अब भोपाल विकास प्राधिकरण (बीडीए) प्रोजेक्ट के लिए फिर से टेंडर दस्तावेज तैयार करेगा। इसके चलते इस स्कीम का काम एक साल बाद शुरू हो पाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत बनने वाला यह प्रोजेक्ट छह साल में पूरा होगा।
बीडीए ने वर्ष 2011 में टीटी नगर के री-डेंसीफिकेशन की योजना तैयार की थी। वर्ष 2012 में इसे मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति ने मंजूर कर दिया था, लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री और वर्तमान उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता की आपत्ति के कारण यह अटक गया था।
इसके बाद गठित कैबिनेट की सब कमेटी ने योजना में कुछ संशोधन बताए थे। बीडीए ने इन संशोधनों के मुताबिक नई योजना बनाई, जिसे मंगलवार को कैबिनेट ने बिना किसी आपत्ति के मंजूर कर लिया। इसमें नाॅर्थ टीटी नगर में पलाश होटल के सामने तोड़े गए आवासों से रिक्त 7 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्सा नए न्यू मार्केट के लिए जरूरत के आधार पर देने की भी सहमति बन गई है।
टेंडर में स्मार्ट सिटी के प्रावधान
सूत्रों के मुताबिक अब बीडीए प्रोजेक्ट के लिए जो टेंडर दस्तावेज बनाएगा, उसमें स्मार्ट सिटी के प्रावधान भी जोड़े जाएंगे। यानी यहां प्रौद्योगिकी के साथ बुनियादी सुविधाओं को विकसित किया जाएगा। यहां एयर कंडीशनिंग की जगह एनर्जी एफिशिएंट डिस्टिंक्ट कूलिंग सिस्टम, ऑटोमैटिक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम, आधुनिक सिक्युरिटी सिस्टम आदि का प्रावधान किया जाएगा।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बनेंगी इमारतें
प्रोजेक्ट में पुराने 2,463 सरकारी मकान तोड़कर 4,284 फ्लैट बनाएंगे जाएंगे। इसमें जी और एफ टाइप के 2916 फ्लैट होंगे, जिसके लिए 9 मंजिला इमारतें बनेंगी। एच व आई श्रेणी के फ्लैट के लिए 3 मंजिला इमारतों का निर्माण होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 454 करोड़ रुपए का लोन लेगा बीडीए
पीपीपी माेड पर काम करने वाली कंपनी सरकारी मकानों को बनाने में 1250 करोड़ खर्च करेगी। इसकी एवज में उसे 19.82 हेक्टेयर जमीन मिलेगी। जिस पर वह अपना कोई प्रोजेक्ट ला सकती है। पूरे इलाके में सड़क, पानी, बिजली, सीवेज आदि इंफ्रास्ट्रक्चर का काम बीडीए खुद करेगा। बीडीए इसके लिए सरकार की गारंटी पर 454 करोड़ का लोन लेगा।
यह काम छह महीने में शुरू हो जाएंगे
कंपनी के चयन से लेकर उसके द्वारा काम शुरू होने में भले ही एक साल का वक्त लगे, लेकिन बीडीए छह महीने में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू कर देगा। करीब 18 करोड़ से कमला नेहरू स्कूल को मॉडल स्कूल के पास नया भवन बनाकर दिया जाएगा। फिर यहां खाली हुई जमीन पर फ्लाईओवर और अन्य काम शुरू होंगे।
दो फ्लाईओवर बनने से घटेगा ट्रैफिक का दबाव
न्यू मार्केट में अपेक्स बैंक तिराहे पर ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए 86.56 करोड़ रुपए से दो फोरलेन फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं। पहला फ्लाईओवर कमला नेहरू स्कूल से होटल पलाश होते हुए टीटीटीआईआर रोड पर पॉलीटेक्निक चौराहे के पास उतारा जाएगा। पहले इसे होटल पलाश तक ही रखा गया था। इसके लिए कमला नेहरू स्कूल के भवन को तोड़ा जाएगा, जबकि दूसरा फ्लाईओवर (ग्रेड सेपरेटर ) टीन शेड से समन्वय भवन तक बनाया जाएगा।
इससे लोगों को तिराहे पर ट्रैफिक सिग्नल ग्रीन होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जबकि फ्लाईओवर के बन जाने पर न्यू मार्केट न जाकर सीधे पॉलीटेक्निक चौराहा या और आगे जाना चाहते हैं, वे इसका उपयोग कर ट्रैफिक जाम से बच सकेंगे।
ये होंगी मुख्य चुनौतियां
एक साल में इस जमीन पर 450 से ज्यादा अतिक्रमण हो गए हैं। सरकारी आवासों को तय वक्त में खाली करना और बड़े प्रोजेक्ट के लिए बड़ी कंपनियों को लाना व पारदर्शिता रखना।
कंपनी को उसके हिस्से की जमीन बिना किसी विवाद के हस्तांतरित करना।
अभी इन इलाकों में आएगी स्कीम
नॉर्थ टीटी नगर, साउथ टीटी नगर, जवाहर चौक, माता मंदिर में सिर्फ आवासीय प्राेजेक्ट आएंगे। न्यू मार्केट और टीटी नगर स्टेडियम के बगल में कमर्शियल प्रोजेक्ट लॉन्च होंगे। सीबीडी के पीछे प्राइवेट पार्टनर अपना प्रोजेक्ट ला सकेंगे।
दूसरे चरण में प्रोफेसर कॉलोनी
नाॅर्थ व साउथ टीटी नगर में 4278 सरकारी मकान बनने से सरकार के पास दो हजार नए आवास होंगे। इन्हें प्रोफेसर कॉलोनी, तुलसी नगर, 1250 क्वार्टर्स में रहने वाले सरकारी कर्मचारियों को आवंटित किया जा सकता है। इसके बाद इन जगहों में दूसरे चरण का निर्माण कार्य किया जा सकता है।