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चालान में कई खुलासे: पैसों के लालच में महिंद्रा का साथ देते रहे अफसर

8 वर्ष पहले
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भोपाल. व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) की ज्यादातर परीक्षाओं में गड़बडिय़ों का सूत्रधार तत्कालीन प्रिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट नितिन महिंद्रा था। उसके इशारे पर ही पीएमटी-2013 के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की गई थी।

व्यापमं के पूर्व परीक्षा नियंत्रक डॉ. पंकज त्रिवेदी मोटी रकम के लालच में महिंद्रा का साथ देते रहे, जबकि अजय सेन और चंद्रकांत मिश्रा ने उसके मददगारों की भूमिका निभाई। यह बातें 750 पेज वाले उस चालान में शामिल हैं, जो बुधवार को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने अदालत में पेश किया।

मामला अमानत में खयानत का है। व्यापमं नियंत्रक ने 11 अक्टूबर, 2013 को एमपी नगर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था आरोपियों ने पीएमटी की प्रक्रिया को तोड़ते हुए कुछ छात्रों को गलत तरीके से विशेष सुविधाएं मुहैया कराईं। बाद में इस मामले की जांच एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई थी। सूत्रों के मुताबिक संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 और 3 की परीक्षाओं में गड़बड़ी के साक्ष्य भी चालान में शामिल किए गए हैं।

अपराध क्या और कैसे
इसमें आरोपियों के कर्तव्य को सिरे से समझाते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि उन्होंने क्या अपराध किया और इसके लिए क्या रास्ता निकाला। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ एसटीएफ को मिले सबूत भी सिलसिलेवार लगाए गए हैं। एसटीएफ ने चालान में उन पत्रों को भी संलग्न किया है, जो जानकारी मांगने के लिए व्यापमं को भेजे गए थे।

मेमोरेंडम में आरोपियों ने जो कहा, वह जस का तस यहां

नितिन महिंद्रा

मैं पीएमटी-२०१३ के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी अपने साथी अजय सेन व चंद्रकांत मिश्रा की मदद से नियंत्रक पंकज त्रिवेदी द्वारा अलग-अलग लोगों से प्राप्त रोल नंबरों में हेर-फेर कर पास करवाता था। ऐसे रोल नंबर उपलब्ध करवाने वालों में मुख्यत: तरंग शर्मा, डॉ. जगदीश सागर, डॉ. संजीव शिल्पकार शामिल हैं। इनसें मुझे लाखों रुपए मिले, जिनमें से काफी रकम मैंने नियंत्रक और अपने साथियों में भी बांटी है। अलग-अलग परीक्षाओं में विवरण के संबंध में लेन-देन का पूरा हिसाब मेरे कंप्यूटर में दर्ज है। पीएमटी-२०१२ में मैंने डॉ. जगदीश सागर, तरंग शर्मा और संजीव शिल्पकार के जरिए काफी लोगों के नंबर सेट किए थे व पास करवाया था। इससे मुझे एक करोड़ से ज्यादा रुपए मिले थे, इनमें से ७५ लाख रुपए मैंने पंकज त्रिवेदी को, पांच लाख रुपए अजय सेन को और कुछ पैसे चंद्रकांत मिश्रा को दिए थे। शेष रकम मैंने अपने दोस्तों के पास रख दी थी, जिसका हिसाब मेरे कंप्यूटर में दर्ज है।

चंद्रकांत मिश्रा
मैं पीएमटी-२०१३ के अतिरिक्त अन्य परीक्षाओं में भी व्यापमं के कंप्यूटर शाखा प्रभारी नितिन महिंद्रा की मदद से अलग-अलग जगहों से प्राप्त रोल नंबरों को सेट करके गलत तरीके से पास करवाता था। उनसे काफी मात्रा में लाखों रुपए प्राप्त किए थे। अलग-अलग परीक्षाओं के विवरण जिनके संबंध में लेन-देन किया था का पूरा विवरण नितिन महिंद्रा के पास रहता था। ऐसा इसलिए क्योंकि बार-बार लेन-देन होने से याद नहीं रहता था और आपस में विवाद के हालात बनते थे। इसमें से मुझे दो लाख रुपए नितिन महिंद्रा ने दिए थे, जिसमें से कुछ खर्च हो गए हैं। शेष पैसे मेरे घर पर रख दिए थे।

अजय कुमार सेन

मैंने पीएमटी-२०१३ के अलावा अन्य परीक्षाओं में भी व्यापमं के कंप्यूटर शाखा प्रभारी नितिन महिंद्रा की मदद से अलग-अलग जगहों से प्राप्त रोल नंबरों को सेट करके गलत तरीके से पास करवाया था। उनसे काफी मात्रा में रुपए मिले। अलग-अलग परीक्षाओं के विवरण जिनके संबंध में लेन-देन का पूरा हिसाब नितिन महिंद्रा के पास रहता था। इसमें से मुझे तीन लाख रुपए नितिन महिंद्रा ने दिए थे। शेष पैसे मेरी पत्नी के पास रख दिए थे।


सत्र न्यायालय में होगी सुनवाई
आगे की सुनवाई एवं कार्यवाही के लिए चालान को सत्र न्यायाधीश की अदालत में भेजा जाएगा। सत्र न्यायाधीश की ओर से मामले को विशेष न्यायालय में स्थानांतरित किया जाएगा। जहां इस मामले के आरोपियों पर आरोप तय किए जाएंगे और गवाही की प्रक्रिया शुरू होगी।

चालान के तरीके पर आपत्ति
त्रिवेदी के वकील अजय गुप्ता ने एसटीएफ के चालान पेश करने के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कहा कि एसटीएफ न तो आरोपी को लाई और न उन्हें (गुप्ता) सूचना दी गई। एसटीएफ के डीएसपी डीएस बघेल ने दावा किया कि नियमों के मुताबिक ही चालान पेश हुआ है।