भोपाल. प्रदेश में अब नए इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं खोले जाएंगे। मौजूदा कॉलेजों की सीट बढ़ाने के लिए एनओसी भी नहीं दी जाएगी। यह घोषणा तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने की। वे सोमवार को मैपकॉस्ट में ‘मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा : चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में बोल रहे थे।
इससे पहले कार्यक्रम में शामिल प्राइवेट कॉलेज संचालकों ने आरोप लगाया था कि सरकार की गलत नीतियों के कारण इंजीनियरिंग में एडमिशन लेने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई है। कॉलेज संचालकों का यह भी कहना था कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा लागू करिकुलम इंडस्ट्रीज की जरूरत के हिसाब से नहीं है।
इंजीनियरिंग कॉलेजों की दुर्दशा सरकार के कारण
प्रदेश में लगातार कम होते एडमिशन से परेशान प्राइवेट इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के संचालकों का गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। उन्होंने तकनीकी शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता से यहां तक कह दिया कि राज्य सरकार ही इंजीनियरिंग कॉलेजों की बदहाली के लिए जिम्मेदार है।
जमीनी हकीकत जानते हुए भी वह धड़ाधड़ नए इंजीनियरिंग कॉलेजों की अनुमति दे रही है। सीटें भी कम नहीं कर रही है। कॉलेज संचालकों ने तकनीकी शिक्षा विभाग की नीतियों पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि के कई फैसलों से छात्र इंजीनियरिंग की पढ़ाई से दूर हो रहे हैं।
मैपकाॅस्ट में आयाेजित परिचर्चा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई और संबंधित प्राइवेट यूनिवर्सिटी व कॉलेजों की हालत उजागर हो गई। कॉलेज संचालकों ने मंत्री श्री गुप्ता सहित मप्र निजी विवि विनियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. अखिलेश पांडे, प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण विनियामक समिति के चेयरमैन प्रो. टीआर थापक व संचालक तकनीकी शिक्षा आशीष डोंगरे के सामने खुलकर गुस्से का इजहार किया।
आधी सीटें भी नहीं भरीं
श्री डोंगरे ने बताया कि इस शिक्षण सत्र में 212 इंजीनियरिंग कॉलेजों में से 11 में एक भी एडमिशन नहीं हुआ है। बीई की महज 48.47% सीटें भर सकी हैं।
मंत्री बोले- बंद होगी एंट्रेंस एग्जाम के नाम पर हो रही नौटंकी
कॉलेज संचालकों की बात सुनने के बाद मंत्री श्री गुप्ता ने नए कॉलेज और नई सीटों के लिए एनओसी न देने की घोषणा की। लेकिन उन्होंने सख्त लहजे में यह भी कहा कि सरकार इंजीनियरिंग कोर्सेस में एडमिशन के लिए एंट्रेंस एग्जाम के नाम पर होने वाली नौटंकी बंद करेगी। एंट्रेस एग्जाम हो या नहीं, इस पर तकनीकी शिक्षा विभाग के अफसराें और प्राइवेट कॉलेज संचालकों को मिलकर प्रस्ताव बनाना चाहिए।
तय हों अधिकतम सीटें
संचालकों ने कहा कि वे इंजीनियरिंग की सीटें सरेंडर कर इनकी अधिकतम संख्या 70,000 करना चाहते हैं। अभी इनकी संख्या 98,902 है। प्राइवेट कॉलेजों के संगठन एटीपीआई के चेयरमैन सुनील बंसल ने कहा कि इस बारे में सभी कॉलेज संचालक चर्चा कर फैसला लेंगे।
अब जाकर चेती सरकार
जानकारों का कहना है कि नए कॉलेजों व सीटों के लिए एनओसी न देने का कदम कुछ समय पहले उठाया गया होता तो इसी शिक्षण सत्र में हालात पर काबू पाया जा सकता था। कॉलेज संचालक सरकार को लगातार आगाह कराते आ रहे थे, लेकिन सरकार अब जाकर चेती है।
सरकार के पास नहीं था कोई तर्कसंगत जवाब
कॉलेज संचालकों ने बैठक में जो आरोप लगाए, उनमें से ज्यादातर का सरकार के पास कोई तर्कसंगत जवाब नहीं था। जवाब देने की बजाय प्रवेश एवं शुल्क समिति के चेयरमैन ने एआईसीटीई की निरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कॉलेज संचालकों पर असली स्थिति छिपाने का आरोप भी लगाया।
निजी यूनिवर्सिटी व कॉलेज संचालकों के अनुसार
>सरकार ने क्वालिटी एजुकेशन पर ध्यान नहीं दिया।
>प्राइवेट संस्थाओं पर बेवजह कमर्शियल चार्जेस लगाए जा रहे हैं। >इंडस्ट्रीज की तर्ज पर प्राइवेट संस्थानों को शासन कोई सब्सिडी नहीं दे रहा।
>शासन ने आरक्षित वर्गों के छात्रों की स्कॉलरशिप अचानक घटा दी, जिससे ड्राॅप-आउट की दर बढ़ने लगी है।
>जेईई-मेन का सही तरह से प्रचार-प्रसार नहीं किया गया।
>रूरल इलाकों में जहां कॉलेज और यूनिवर्सिटीज हैं, वहां की सड़कें खराब होने से छात्र और पेरेंट्स वहां आने से कतराते हैं।
>आरजीपीवी ने संबद्धता शुल्क आठ से दस गुना तक बढ़ा दिया है।
तकनीकी शिक्षा विभाग के अफसरों के मुताबिक
>पीईटी खत्म कर जेईई-मेन पहली बार लागू करना।
>जेईई-मेन का रिजल्ट जुलाई में आना, जबकि पीईटी का रिजल्ट जून में आता था।
>उच्च शिक्षा विभाग ने एडमिशन की कार्रवाई 30 जून तक पूरी कर ली, इससे छात्रों का रुझान इंजीनियरिंग की तरफ कम रहा।
>विभिन्न पीजी कोर्सेस में दाखिले के लिए जरूरी यूजी के रिजल्ट यूनिवर्सिटीज ने देर से जारी किए।
>एआईसीटीई ने कॉलेजों को मान्यता जून माह के दूसरे सप्ताह में जारी की, जिससे काउंसलिग प्रक्रिया में देरी हुई।
>आईटी और कंप्यूटर साइंस में रोजगार के अवसरों में कमी आई।
सरकार का दावा
इंजीनियरिंग में एडमिशन घटने की समीक्षा की गई है। आरोपों एवं सुझावों पर गौर किया जाएगा। प्रदेशभर की इंडस्ट्रीज का सर्वे किया जा रहा है। उनसे पूछा जाएगा कि उन्हें किस तरह के इंजीनियर्स की जरूरत है। उन्हीं के मुताबिक कोर्स डिजाइन होगा। इसी तरह अन्य सुधार भी लागू होंगे।'
डॉ. अखिलेश पांडे, चेयरमैन, मप्र निजी विवि विनियामक आयोग
कॉलेज संचालकों के सुझाव
>काउंसलिंग की प्रक्रिया 12वीं के रिजल्ट के साथ ही शुरू हो और आईआईटी व एनआईटी की काउंसलिंग पूरी होने के दो हफ्ते बाद तक चले। >एंट्रेंस एग्जाम की बजाय सीधे 12वीं के मार्क्स के आधार पर एडमिशन हों। ऐसा न होने पर पीईटी दोबारा शुरू की जाए। >ऐसे संस्थान और ब्रांच, जिसमें एडमिशन लेने में छात्रों की रुचि नहीं है, उन्हें बंद किया जाए। > गुणवत्ता उन्नयन के लिए स्टेट लेवल क्वालिटी इंप्रूवमेंट प्रोग्राम लॉन्च हो।
बेहतर विकल्प खोजने होंगे
कॉलेजों को फैकल्टी की स्थिति सुधारनी होगी। माउथ पब्लिसिटी से भी काफी फर्क पड़ता है। हमारे संस्थानों का वातावरण ठीक नहीं बन पा रहा है। बेहतर स्थिति के लिए विकल्प खोजने की जरूरत है।'
उमाशंकर गुप्ता, तकनीकी शिक्षा मंत्री
नजरअंदाज न करे सरकार
प्रदेश में प्रोफेशनल शिक्षा का 90 फीसदी हिस्सा प्राइवेट कॉलेजों के पास है। इसके बाद भी शासन प्राइवेट कॉलेजों को नजरअंदाज कर नीतियां बनाता है। इस समय सभी को मिलकर सीटें सरेंडर करने पर विचार करना होगा।'
सुनील बंसल, चेयरमैन, एटीपीआई
स्कॉलरशिप बढ़ाई जाए
सरकार ने आरक्षित वर्ग के छात्रों की स्काॅलरशिप काफी कम कर दी है। इससे छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ रहे हैं। शासन के अधिकारी इसे सरकार का पैसा बचाने की बात कहकर मामले को टाल देते हैं।'
सुरेश चौकसे, सचिव, एटीपीआई
बिना निरीक्षण मान्यता
एआईसीटीई निजी कॉलेजों का निरीक्षण किए बिना ही मान्यता दे रही है। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।'
डॉ. सुनील कुमार, ओएसडी, प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण विनियामक समिति