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चेहकेंगी चिड़ियां, महकेंगे फूल, रोज सुबह सुनाई देगी राजा की दहाड़

8 वर्ष पहले
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भोपाल। भोपाल में विश्वस्तरीय जूलॉजिकल पार्क और चिडिय़ाघर बनेगा। यहां देश-विदेश के वन्य प्राणियों को रखा जाएगा। यहां दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधे भी लगाए जाएंगे। पहले चरण में यह पार्क 348.72 हेक्टेयर क्षेत्र में बनेगा। इसके बाद इसका और विस्तार किया जाएगा। केरवा के पास वन विहार फेज- 2 बनाने की कवायद शुरू हो गई है, जिसे राज्य सरकार ने हरी झंडी दे दी है।

यह पार्क व जू केरवा, कलियासोत, और बैरागढ़ चीचली तक वन विभाग, सीपीए और राजस्व की भूमि पर बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 1575 करोड़ रुपए है। इस राशि का 75 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार देगी। केंद्र सरकार इसे अनुमति दे चुकी है। 130 करोड़ रुपए पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप से मिलेंगे। शेष राशि राज्य सरकार देगी।

बनाई जा रही कमेटी

परियोजना को साकार रूप देने के लिए इको टूरिज्म द्वारा एक कमेटी बनाई जा रही है। सरकार ने इसके लिए ट्रांजेक्शन सलाहकार नियुक्त करने की अनुमति दे दी है। वहीं, पार्क के निर्माण के लिए विश्वस्तरीय कंसल्टेंट नियुक्त किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। इसके लिए जल्द ही निविदाएं निकाली जाएगी।

सैद्धांतिक अनुमति मिली

वन विहार फेज-2 जूलॉजिकल और विश्वस्तरीय चिडिय़ाघर बनाने के लिए इको पर्यटन विकास निगम को सैद्धांतिक अनुमति मिल चुकी है। इसमें केरवा, दौलतपुरा, ग्राम चिचली, मंडोरा स्थित वन विभाग, सीपीए और राजस्व विभाग की जमीन शामिल है। यही नहीं, सेंट्रल जू अथॉरिटी ने भी पार्क और चिडिय़ाघर बनाने की अनुमति दे दी है।

॥भोपाल में वन विहार फेज-2 के तहत विश्वस्तरीय जूलॉजिकल पार्क और चिडिय़ाघर बनाने की परियोजना पर काम शुरू हो गया है। पहले चरण में परियोजना की सभी आवश्यकताओं को पूरा किया जाएगा। इसके लिए जमीन, नेचुरल हैबीटेट और यहां लाए जाने वाले विदेशी जानवरों के लिए अनुकूल परिस्थितियों के संबंध में विश्वस्तरीय कंसल्टेंट रखे जा रहे हैं, जो वन विभाग की महत्वाकांक्षी परियोजना को आकार देंगे।
- सतीश त्यागी, सीईओ, इको पर्यटन विकास निगम