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हल्कीबाई के मिट्‌टी के बर्तनों की पहचान दुबई तक, चाक से बनाती हैं आकर्षक टेराकोटा ज्वेलरी, विदेशों में होती है सप्लाई / हल्कीबाई के मिट्‌टी के बर्तनों की पहचान दुबई तक, चाक से बनाती हैं आकर्षक टेराकोटा ज्वेलरी, विदेशों में होती है सप्लाई

Chhatarpur News - छतरपुर जिले में धमना गांव की महिला द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने के हुनर ने विदेशों में भी पहचान दिला दी है। इनकी...

Bhaskar News Network

Mar 08, 2018, 02:10 AM IST
हल्कीबाई के मिट्‌टी के बर्तनों की पहचान दुबई तक, चाक से बनाती हैं आकर्षक टेराकोटा ज्वेलरी, विदेशों में होती है सप्लाई
छतरपुर जिले में धमना गांव की महिला द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने के हुनर ने विदेशों में भी पहचान दिला दी है। इनकी खासियत है कि मिट्टी से जटिल से जटिल वस्तुओं का निर्माण कर आकार देने में इन्हें महारत हासिल है। महिला टेराकोटा, टेराकोटा ज्वैलरी और मिट्‌टी से आधुनिक बर्तनों का निर्माण करतीं है। यह अपने द्वारा निर्मित उत्पादों को लेकर दुबई गईं हुईं थीं, जिसका खर्चा सरकार ने उठाया था। महिला द्वारा बनाए गए उत्पादों को उनके पति धनीराम प्रजापति दुबई लेकर गए थे, जो पूरे एक माह वहां रहे और उन्होंने इन उत्पादों को प्रदर्शित किया। इसका पूरा खर्चा ग्रामोद्योग विभाग द्वारा उठाया गया था।

राजनगर ब्लॉक धमना गांव निवासी हल्कीबाई पति धनीराम प्रजापति के मिट्टी के दिए और तवे, ज्वैलरी, किचिन माड्यूल, शोपीस सामग्री सहित अन्य मिट्‌टी से बने हुए उत्पादों की डिमांड देश ही नहीं विदेशी शहरों में होने लगी।

डिमांड बढ़ती देख उन्होंने कुछ अन्य कारीगरों को भी रख लिया। कुछ समय पहले तक वह मिट्टी के बर्तन बनाकर हाट मार्केट, शॉपिंग मॉल, मेले सहित अन्य महानगरों में सप्लाई किए जाते थे, लेकिन अब महिला द्वारा निर्मित मिट्‌टी बर्तन विदेशों भी जिले की पहचान बना रहें है।

महिला ने खरीदा इलेक्ट्रॉनिक चाक, बड़ी फैक्ट्री लगाने का सपना

महिला हल्कीबाई का कहना है कि ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत हमें सहयोग मिला और हम अब इलेक्ट्रॉनिक चाक का उपयोग करने लगे, जिससे कि कम मेहनत लगी है और इसमें समय की बचत भी हो जाती है। उनका कहना है कि हम और हमारे पति मिलकर यह कार्य कर रहे हैं। वह अपने इस कारोबार के जरिए अन्य लोगों को रोजगार मुहैया करवाना चाहती हैं। मिट्टी के बर्तन बनाने वाली फैक्ट्री बनाने का सपना भी संजो रखा है, लेकिन इसके लिए उसके पास पैसा नहीं है। यदि सरकार इस तरह के लोगों को थोड़ा प्रोत्साहन करें, तो वह महिला युवा पीढ़ी के लिए रोजगार के लिए कई नए अवसर पैदा करवा सकती है।

14 हजार रुपए की सहायता मिलने

पर शुरू हुआ था कार्य

महिला हल्कीबाई को 2005 से इस कार्य को लगातार ही कर रहीं है। इसमें उन्हें अपने पति धनीराम प्रजापति का भरपूर सहयोग मिल रहा है। महिला हल्कीबाई 2011 में समूह से जुड़ी और उन्हें 14 हजार रुपए सीड लोन के रुप में प्रदान किए गए, जिससे अब उनके रोजगार में बढ़ोत्तरी हुई है और इस लोन के सहारे उन्होंने अपने काम को भी बढ़ाया है। गरीब होने के बावजूद महिला को पैसे कमाने का लालच नहीं है, लेकिन उसके बनाए बर्तन लोगों को पसंद आएं, यही उसे अपनी असल कमाई लगती है।

कई आकर्षक ज्वैलरी और शोपीस सामग्री महिला ने बनाईं : महिला हल्कीबाई प्रजापति कम पढ़ी लिखी होने के कारण अपने इस हुनर की मार्केटिंग नहीं कर पाती, लेकिन उन्हें आजीविका मिशन से भरपूर सहयोग मिल रहा, जिससे उनके द्वारा निर्मित उत्पादों की सप्लाई कराई जाती है। मिट्टी के बर्तनों में तवे के अलावा महिला ने मिट्टी का जग, कटोरी, गिलास, प्लेट, केतली, दही जमाने के लिए कटोरा और वाटर कूलर, शोपीस सामग्री, सुराई, ज्वैलरी सहित अन्य कई वस्तुएं तैयार की हैं। महिला हल्कीबाई के बनाए बर्तनों के बारे में शहर के अधिकतर लोग अंजान है, जबकि इनके बर्तनों को विदेशों में भी सराहा गया है।

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हल्कीबाई के मिट्‌टी के बर्तनों की पहचान दुबई तक, चाक से बनाती हैं आकर्षक टेराकोटा ज्वेलरी, विदेशों में होती है सप्लाई
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