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भू-स्वामी बनकर एनटीपीसी से मुआवजा हड़पने की काेशिश, भुगतान रोका गया

5 वर्ष पहले
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एनटीपीसी से अवैध रूप से मुआवजा हासिल करने के पहले भी हो चुके हैं प्रयास

भास्कर संवाददाता। छतरपुर

मृतक व्यक्ति का उत्तराधिकारी बनकर फर्जी तरीके से मुआवजा हासिल करने का मामला सामने आया है। एक महिला ने कई साल पहले मृत हुए प|ी होने का दावा किया। जिला प्रशासन ने महिला को उत्तराधिकारी मानते हुए मुआवजा राशि स्वीकृत करने के आदेश दिए हैं। अब इस मामले में शिकायत होने पर एसडीएम ने फिलहाल भुगतान रोक दिया है। साथ ही मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

इस मामले को लेकर एसडीएम राजनगर के समक्ष मनकारी गांव के विजयप्रताप सिंह ने एक आपत्ति दर्ज कराई है, जिसमें बताया गया है कि एनटीपीसी द्वारा बरेठी गांव में किसान की भूमि अर्जन कर मुआवजा राशि भू-अर्जन अधिकारी राजनगर के समक्ष वितरण करने के लिए सौंप दी गई थी। इसमें किसान के किसान पंचा पिता अच्छेलाल के नाम पर दर्ज जमीन का खसरा नंबर 718/2 अर्जन किया गया था। पंचा के नाम पर 50 लाख रुपए से अधिक राशि का मुआवजा स्वीकृत किया गया है। पंचा का निधन हो चुका है। गांव में उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं है। इस कारण पंचा के नाम स्वीकृत मुआवजा राशि को हासिल करने के लिए दावेदार सामने आ रहे हैं।

वोटर लिस्ट में पिता का नाम अलग

शिकायतकर्ता ने वर्ष 1971 की बरेठी और बम्होरी गांव की वोटर लिस्ट पेश की है। इन दोनों ही लिस्ट में केशरिया नाम की महिला है। बरेठी निवासी पंचा के पिता का नाम अच्छेलाल, जबकि बम्होरी के पंचा के पिता का नाम गोला दर्ज है। दाेनों लिस्ट में पंचा और केसरिया की उम्र में भी करीब 20 साल का अंतर है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया मुआवजा हासिल करने के लिए पूरा गिरोह लगा हुआ है। महिला के पीछे सक्रिय लोग मुआवजा राशि हड़पने की कोशिश में है। वे दो अलग - अलग गांव में रह रहे समान नाम के लोगों का फायदा उठाकर राशि हड़पने की कोशिश में हैं।

जांच की जाएगी
इस मामले में राजनगर एसडीएम सोनिया मीणा का कहना है कि उनके पास शिकायत आई है। इस कारण उन्होंने भुगतान रोक दिया है। वे पूरे मामले की जांच करा रही हैं। मामले की जांच के बाद ही भुगतान किया जाएगा।

मुआवजा स्वीकृत होने के कुछ दिनों बाद अचानक ही मृतक किसान की प|ी और बच्चे सामने आ गए हैं। विजावर तहसील के बम्हौरी गांव की महिला केसरिया ने पंचा की प|ी होने का दावा किया है। उसने दस्तावेज भी प्रशासन के सामने पेश किए हैं। महिला ने बताया कि पंचा बंशल 30-35 वर्ष पूर्व बरेठी गांव छोड़कर विजावर तहसील के बम्हौरी गांव चले गए थे, उनके वारिस महिला ने पुत्रों मे किशोरी, गोरेलाल, कल्लू सहित पुत्री कोशिल्या, फूलवती बताया है। जबकि किसान की देखरेख सहित सेवा मुन्ना पिता उमरौवा बंशल कर रहा था। इस दौरान मृतक का कोई भी वारिस नहीं था, लेकिन लाखों रुपए की मुआवजा राशि हड़पने के लिए यह गिरोह वारिस बनकर सामने आने लगा।

अचानक प|ी आई सामने
पहले मुन्ना ने किया दावा
किसान पंचा को कोई उत्तराधिकारी बरेठी गांव में नहीं रह रहा है। उसका मुआवजा हासिल करने के लिए पहले गांव के ही किसान मुन्ना पिता उमरौवा वंशल ने दावा किया। मुन्ना का कहना है कि पंचा का कोई नहीं था। अंत समय में उसे पंचा की सेवा की। इससे किसान की मृत्यु के बाद उस भूमि के मुआवजे पर भी उसका हक है।

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