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योजना से खिलवाड़ : डेढ़ लाख मजदूरों काे अब भी मनरेगा के तहत मजदूरी का इंतजार
मजदूरी न मिलने से लगतार हो रहा अन्य प्रदेशों की ओर पलायन
भास्कर संवाददाता। छतरपुर
जिले के ग्रामीण अंचलों के गरीब तबके के लोग रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर रहे हैं। वहीं उनके बच्चे भी साथ जाने से शिक्षा से वंचित हो रहे है। इन दिनों सिर पर बड़ी पोटली और गृहस्थी लेकर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब सहित अन्य प्रदेशों की ओर पहुंचने का सिलसिला निरंतर जारी है। जिला पंचायत की रोजगार मिलने की प्रगति रिपोर्ट मनरेगा योजनाओं की पोल खोल रही है।
शासन भले ही ग्राम पंचायतों द्वारा रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्रामीणों को 150 दिन रोजगार देने की बात कह रही है, लेकिन इसका वास्तवित लाभ ग्रामीणों को प्राप्त नहीं हो रहा है, जिससे रोजगार की तलाश में ग्रामीण अन्य प्रदेशों की ओर पलायन करने में जुटे हुए है। ग्राम पंचायतों में गरीब वर्ग के मजदूर लोगों के जॉबकार्ड बनाएं गए है। पोर्टल के अनुसार जिले में कुल 1 लाख 57 हजार 724 जॉबकार्डधारी है, इसमें 43086 परिवारों ने रोजगार की मांग की थी, इसमें 100 दिनों का रोजगार महज 3660 परिवारों को दिया गया है। इस आंकड़े से मनरेगा के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिंह लग रहे। ग्राम पंचायतों में मजदूरों को रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है। इसलिए ग्रामीण दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और अन्य प्रदेशों की ओर पलायन कर रहे है। इसमें जॉबकार्डधािरयेां के आंकड़े के अनुसार अभी भी डेढ़ लाख मजदूरों को मजदूरी का इंतजार है।
100 दिन तो दिया नहीं, 150 क्या देंगे: ग्रामीणों को गांव मेंे ही रोजगार उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए रोजगार गारंटी योजना चालू की गई थी, जिसमें मजदूरों को साल में पहले 100 दिन रोजगार उपलब्ध कराना शासन ने नियत किया था। अब बेरोजगारी को देखते हुए शासन ने इसे 100 दिन की साल में 150 दिन मजदूरी देना तय किया है, लेकिन यहां पर तो ग्रामीणों को 100 दिन ही रोजगार ठीक से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, तो 150 दिन रोजगार उपलब्ध कैसे कराएंगे।
मजदूरी को लेकर होती है कई शिकायते: रोजगार गारंटी के तहत मजदूरी न मिलने की शिकायत भी जिले के अधिकारियों को ग्रामीणों द्वारा की जाती है, लेकिन अधिकारियों द्वारा उस शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है, जिससे वह रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो जाते है। वहीं कई शिकायतें तो ऐसी भी आती है कि ग्राम पंचायतों द्वारा मजदूरों से कार्य, तो कराया लिया जाता है, लेकिन उनका भुगतान नहीं किया जाता है।
छतरपुर। जिले के ग्रामीण अंचलों के गरीब तबके के लोग रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर रहे हैं।
चहेतों को दिया जाता है काम
विजावर जनपद पंचायत क्षेत्र निवासी लखन सिंह ने बताया कि उन्हें गांव में पंचायत द्वारा कभी भी कोई काम नहीं दिया गया है। लोग बताते है कि मनरेगा में साल में 150 दिन काम मिलता है। सुनने में यह अच्छा लगता है, लेकिन हकीकत कोसों दूर है। मैं मजदूरी करने के लिए गांव से परदेश जा रहा हूं। ग्राम पंचायतों द्वारा अपने अनुसार ही कार्य कराया जाता है। मजदूरी का भुगतान अब खातों में होने लगा है, जिससे सरपंच द्वारा अपने अनुसार ही अपने चहेतों के नाम मजदूरी की उपस्थिति में डाल दिया जाता है और उन्ही के खातों में राशि पहुंचती है। इसलिए हम लोगों को ग्र्राम पंचायत वाले काम नहीं देते है।
जपं जॉबकार्डधारी 100 दिन का रोजगार
गौरिहार 15954 361
छतरपुर 31887 517
नौगांव 17535 751
बक्स्वाहा 15705 111
बड़ा मलहरा 21059 373
विजावर 21336 259
राजनगर 25117 780
लौड़ी 9131 508
जिले के आंकड़ों पर एक नजर