संगीतमय भागवत कथा में रुकमणि विवाह की लीला का वर्णन किया
अहंकार मनुष्य को नष्ट कर देता है : ब्रम्हानंद महाराज
भास्कर संवाददाता। छतरपुर
चेतगिरी कालोनी में स्थित हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन कथा के दौरान श्रद्धालुओं में भारी उत्साह दिखाई दिया। कथा में भगवान की बाल लीलाओं, रास लीला साथ ही कंस वध और रुकमणि विवाह की कथाओं का मनोहारी वर्णन किया गया। कथा सुनने के लिए भारी संख्य में भक्तजन मौजूद रहे।
कथा वाचक व्यास ब्रहृानंद महाराज ने कहा कि चाहे देवता, मानव, दैत्य हो लेकिन अंहकार किसी को नहीं करना चाहिए। अंहकार मनुष्य को नष्ट कर देता है। उन्होंने कहा कि राजा इंद्र को अपने पद का अभिमान हो गया था तो उन्होंने श्रीकृष्ण को भी साधारण मनुष्य मान लिया तब भगवान कृष्ण ने इंद्र का अभिमान मिटाने के लिए गोवर्धन पर्वत को उठाकर बृज की रक्षा की। इस कथा से श्रोताओं को को संदेश दिया कि धन शक्ति, पद का अभिमान नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गोवर्धन की पूजा एवं परिक्रमा करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते है। गोवर्धन पूजा सर्व हितकारी है इसके पश्चात उन्होंने कंस वध, देवकी वासुदेव का बंधनमुक्त करना। उग्रसेन को फिर से राजा बनाना और रूकमणि विवाह का सुंदर वर्णन किया। रूकमणि के चरित्र को बताकर उन्होंने माता-बहनों को बताया कि नारी अगर रूकमणि की तरह आचरण करे तो वहीं शक्ति की स्वरूप होती है। सभी ने रूकमणि विवाह का आंनद लिया। रुक्मणि विवाह की मनोरम झांकी भी सजाई थी। जिसे देख भक्तजन अतिप्रसन्न हुए। कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा का वर्णन किया जाएगा।
कथा का वाचन करते हुए महाराज।