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बचे हुए पहाड़ पर आईं दरारें, अिधकारियों ने काम की रफ्तार बनाए रखने के दिए निर्देश

7 वर्ष पहले
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रुठियाई और विजयपुर स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेनें

घटनाके बाद ट्रेनों को रुठियाई और विजयपुर स्टेशनों पर रोककर रखा गया। उज्जैन-देहरादून एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे तक विजयपुर स्टेशन पर रुकी रही। वहीं नागदा-बीना तीन घंटे रुठियाई पर खड़ी रही। इधर गुना स्टेशन पर तीन मालगाड़ियां कई घंटे तक रोककर रखी गईं।

कामकी रफ्तार रुके : अधिकारियोंस्पष्ट निर्देश दिए कि काम की रफ्तार कम हो। हालांकि घटना से सबक लेते हुए अब सावधानी बरतने की हिदायत दी गई, क्योंकि आने वाले दिनों में और भी धमाके होना है।

दिल्ली तक पहुंची बात, बोर्ड के अिधकारियों ने भी की पूछताछ

इसघटना को लेकर अच्छा खासा बवाल मच गया। शुरूआत में एकाध घंटे तक ट्रेन रुकी तो ज्यादा चिंता नहीं की गई। पर जैसे ही सूचना मिली कि तीन-चार घंटे तक ट्रैक के चालू होने की संभावना नहीं है, तो हड़कंप मच गया। सूत्रों ने बताया कि भोपाल िडवीजन से होते हुए बात रेलवे बोर्ड तक पहुंच गई। आनन-फानन में तमाम बड़े इंजीनियरों को मौके पर पहुंचने के आदेश जारी हो गए। हालांकि स्थानीय मेंटेनेंस डिपार्टमेंट के अमले ने इस बीच काम संभाल लिया। रात करीब 10.20 बजे तक लाइन क्लीयर कर दी गई। इसके बाद गाड़ियां इस पर से गुजारी गईं। हालांकि उनकी रफ्तार 10 किमी/घंटे रखी गई। साथ ही जगह-जगह रोककर चलाया गया।

धमाके के बाद बचे हुए पहाड़ में आईं दरारें, जिसके चलते ट्रैफिक को इस हिस्से से धीमी

रात 10.20

बजे तक लाइन को क्लीयर किया जा सका। उसके बाद इस हिस्से में रातभर ट्रेनों को 10 किमी/घंटे की रफ्तार से वह भी रोक-रोककर गुजारा गया।

शाम 5.20-6.20

बजे के बीच पहाड़ को डाइनामाइट से उड़ाने की योजना थी। इसके लिए बकायदा एक घंटे का ब्लॉक भी लिया गया था, लेकिन काम तय योजना से नहीं हो पाया।