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दो साल में ही खंडहर हो गया आदिवासी का कुटीर

6 वर्ष पहले
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सेटलमेंट योजना के तहत सिरसी ग्राम पंचायत के ताडखेड़ा गांव बनी थी आवासीय कुटीर

भास्कर संवाददाता | बमोरी

क्षेत्र के ताडखेड़ा गांव में आदिवासियों के लिए बनी कुटीर महज दो साल में ही बद से बदतर होकर खंडहरों में तब्दील होने लगी है। स्थिति यह है कि कुटीरों में न तो छत बची है और न ही दीवारों में दरवाजे व खिड़कियां ही बचे हैं। इतना ही नहीं चबूतरा और सीमेंट कांक्रीट सड़क भी उखड़कर गायब हो गई है। हैंडपंप भी खराब पड़ा है।

दरअसल सिरसी ग्राम पंचायत के ताडखेड़ा गांव में वर्ष 2012-13 में 25 लाख की लागत से आदिवासियों परिवारों के लिए आवासीय कुटीरों का निर्माण कराया गया था। पंचायत द्वारा निर्मित इन 25 कुटीर का काम बेहद घटिया स्तर से हुआ था।

ग्रामीणों का कहना है कि एक तो कुटीर तय समय से काफी देर से बनी है और अब घटिया निर्माण की वजह से अब इनमें लोग भी नहीं रह रहे हैं। स्थिति यह हो गई है कि यह आवास कुटीर बसाहट नहीं हो पाने से खंडहर में बदल गई है। इस आवासीय कॉलोनी के बीच में एक बड़ा चबूतरा, सीसी व हैंडपंप भी है। लेकिन बसाहट नहीं होने से यह भी बेकार हो रहे हैं।

हमने सहायक यंत्री को जांच सौंपी है। संबंधितों को नोटिस भी जारी किया है। काम नहीं कराएंगे तो जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। आर के गोस्वामी, सीईओ जनपद पंचायत गुना