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दलालों ने खुद को डीलर का एजेंट बताया, आरटीओ ने मांगे कागज

5 वर्ष पहले
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आरटीओ कार्यालय में सक्रिय दलालों ने अब नया पैंतरा चला है। वे दावा कर रहे हैं कि उन्हें वाहन डीलरों ने बाकायदा इस काम के लिए अधिकृत किया है। हालांकि आरटीओ ने उनसे डीलरों द्वारा जारी लेटर मांगे हैं। इसके साथ ही हिदायत भी दी कि अगर लेटर नहीं लाए और विभाग के परिसर में दिखाई दिए तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

बुधवार को लंबे समय बाद प्रभारी आरटीओ विक्रम सिंह कंग दफ्तर पहुंचे। भास्कर द्वारा लगातार उठाया जा रहा दलालों का मुद्दा ही उनके एजेंडे पर सबसे ऊपर था। उन्होंने परिसर व अन्य जगहों पर काम करने वाले एजेंटों को तलब किया था। इस दौरान ज्यादातर एजेंट यह दावा करते रहे कि उन्हें तो वाहन डीलरों द्वारा अधिकृत किया गया है। वे तो डीलर पाइंट पर आने वाले ग्राहकों का काम ही करते हैं। इस पर आरटीओ ने उनसे इसका सबूत मांगा।

उन्होंने कहा कि डीलर द्वारा जारी लेटर दिखाएं। इस पर ज्यादातर एजेंट बगले झांकते हुए नजर आए, जबकि कुछ ने दावा किया कि उनके पास कई साल पहले जारी किया गया लेटर है पर आरटीओ ने यह तर्क खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि आप नया लेटर लेकर आएं, तभी आपको यहां आने दिया जाएगा।

उन्होंने ऑफिस में मौजूद स्टाफ से कहा कि परिसर में अनधिकृत रूप से घूमने वालों पर एफआईआर दर्ज कराओ। अगर कोई डीलर का लेटर नहीं दिखा पाता है तो उसे अंदर न घुसने दिया जाए।

स्टाफ से कहा : अनधिकृत लोगों पर करें एफआईआर : उन्होंने ऑफिस में मौजूद स्टाफ से कहा कि परिसर में अनधिकृत रूप से घूमने वालों पर एफआईआर दर्ज कराओ। अगर कोई डीलर का लेटर नहीं दिखा पाता है तो उसे अंदर न घुसने दिया जाए। उधर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले एजेंट को उन्होंने कहा कि अगर आपके खिलाफ शिकायत मिली तो आप पर एफआईआर दर्ज होगी। उन्होंने कहा कि आप कार्यालय में नहीं दिखेंगे न ही मेडिकल सर्टिफिकेट देंगे। जिसे इसकी जरूरत होगी, वह खुद डॉक्टर के पास जाकर इसे ले लेगा। उधर जानकार कहते हैं कि असली सवाल दलाल व ऑफिस के स्टाफ के बीच की मिलीभगत का है। इस कारण लोगों के काम सीधे न होकर दलालों के माध्यम से ही हो पाते हैं। अगर दलाल किसी डीलर से लेटर लेकर आ भी जाएं तो भी यह समस्या अपनी जगह रहेगी। ज्यादातर लोग आरटीओ से जुड़े काम करवाने में परेशानी महसूस करते हैं।

दलालों का फर्जीवाड़ा उजागर कर चुका है भास्कर
भास्कर पहले ही दलालों का फर्जीवाड़ा उजागर कर चुका है। गड़बड़ी उजागर करने के लिए खुद भास्कर संवाददाता ने अपना मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया था। इसमें फोटो किसी और व्यक्ति का लगाया गया। इसके बावजूद दलाल ने उसे मौके पर ही बना दिया। न डाक्टर से कोई चेकअप हुआ, न ही किसी तरह की कोई जांच। इसी प्रकार प्रदूषण की जांच और पुलिस वेरिफिकेशन से संबंधित काम कराए जाने के मामले आ सकते हैं।

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