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मां की ममता: हमें बच्चों को गर्म खाना खिलाना है, स्कूल वाले गेट नहीं खोलते, इसलिए जाली में हाथ डालकर खिलाते हैं

5 वर्ष पहले
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ये गलत सही की बात नहीं
स्कूल का अनुशासन: अगर गेट खोल देंगे तो सभी स्कूल में ही खिलाएंगे खाना, बैग में भेजंे टिफिन
शहर की दलवी कालोनी में स्थित अल्फा स्कूल में जब लंच टाइम की घंटी बजते ही नर्सरी के नन्हे-मुन्ने बच्चे सीधे मुख्य गेट की ओर भागते हैं। इसलिए नहीं कि वे बाहर जाकर खाना-पीना या खेलना चाहते हैं। बल्कि इसलिए क्योंकि वहां उनकी मां व घर के अन्य लोग गरमा-गरम व ताजा खाने से भरा टिफिन लेकर खड़े रहते हैं। दरवाजा बंद ही रहता है और बाहर से ही माताएं अपने बच्चों को खाना खिलाती रहती हैं। गेट के इधर से जाली में हाथ डालकर बेटे को खाना खिला रही मां राधा धाकड़ का कहना है कि मुझे बच्चे को गर्म खाना खिलाना है। लेकिन स्कूल वाले गेट ही नहीं खोलते हैं।

ये नजारा अल्फा स्कूल में लंच टाइम का है। दरअसल हर मां अपने बच्चे को गरम खाना खिलाना चाहती है लेकिन स्कूल प्रबंधन अनुशासन बनाए रखनेे के लिए गेट नहीं खोलता इसलिए बच्चों को ऐसे खाना खिलाया जाता है। इस दौरान बच्चे खेलते-खेलते खाना खाते रहते हैं। दूसरे चित्र में गेट के पार अपने बच्चे को टिफिन से खाना मां।

अगर हम गेट खोलेंगे तो अनुशासन बिगड़ेगा- प्राचार्य
आमतौर पर स्कूली बच्चों को घर से टिफिन रखकर ही भेजा जाता है। पर यहां मामला कुछ अलग है। स्कूल के प्राचार्य जॉय वर्गीस का कहना है कि लगभग 70 फीसदी बच्चे टिफिन लेकर ही आते हैं। जो नहीं आते, उनके माता-पिता इसी तरह उन्हें खाना खिलाने आ जाते हैं। उनका कहना है कि गेट खोलने से अनुशासन बिगड़ेगा। अगर खाना ही खिलाना है तो बच्चों को घर पर ही रखें, स्कूल क्यों भेजते हैं।

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