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पुराने 197 का कोई निर्णय नहीं, मोर्चा ने 175 नए बंधुआ मजदूरों की सूची सौंपी

5 वर्ष पहले
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बमोरी में बंधुआ मजदूरी का मुद्दा गहराता जा रहा है। इस मामले में मानव अधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन से इस मामले की जांच रिपोर्ट तलब की है। इसके अलावा बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने प्रशासन को 175 नए बंधुआ मजदूरों की सूची सौंपी है। इससे पहले मोर्चा द्वारा सामने लाए गए 197 मजदूरों के संबंध में प्रशासन अब तक निर्णय नहीं ले पाया है। इसी को लेकर आदिवासी 15-16 फरवरी को प्रशासन के खिलाफ भोपाल में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

मोर्चा के कार्यवाहक निदेशक निर्मल गोराना ने कलेक्टर को इस संबंध में पत्र भेजा है, जिसके साथ सूची संलग्न की गई है। इस पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री के अलावा मानवाधिकार आयोग एवं केंद्रीय श्रम मंत्री को भी भेजी गई है। इसमें श्री गोराना ने प्रशासन से आग्रह किया है कि पूर्व में जिन 197 मजदूरों की जानकारी प्रशासन को दी गई थी। उनके संबंध में जल्द से जल्द निर्णय लिया जाए। 20 जनवरी को स्वामी अग्निवेश के नेतृत्व में इस मामले को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया। इसके बावजूद अब तक इस मुद्दे पर फैसला नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने अगर जल्द ही फैसला नहीं तो मजदूरों के साथ सड़कों पर उतरेंगे। उधर मोर्चा ने हाईकोर्ट में भी याचिका दायर कर दी है। इसके बाद अब प्रशासन के सामने और मुश्किलें खड़ी हो सकती है। हाईकोर्ट इस मामले में जानकारी तलब कर सकता है।

प्रशासन को एक माह में सौंपना है जांच रिपोर्ट
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में राज्य सचिव को पत्र लिखा है। एक माह में रिपोर्ट मांगी है। वहीं जिला प्रशासन के पास भी आयोग का पत्र आ चुका है।

बार-बार बयान क्यों ले रहे हैं
मोर्चा का कहना है कि 93 मजदूरों ने पहले बयान में खुद का बंधुआ बताया था। लेकिन इसके बाद फिर एक सतर्कता कमेटी बनाकर फिर उनके बयान दर्ज कराए गए। अब पटवारियों को मजदूरों के पास भेजकर बयान लिए जा रहे हैं। मजदूर अनपढ़ हैं। इससे उनसे बयान सुनाए बिना ही हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। मोर्चा के श्री गोराना ने बताया कि मजदूर डरे हुए हैं। उन्हें परेशानियां आ रही है। प्रतिदिन मजदूर हमें फोन कर रहे हैं। जिले में 450 बंधुआ मजदूर हैं। इन्हें प्रमाणपत्र दिलाकर ही हम दम लेंगे।

नई सूची में इन गांवों के मजदूर शामिल
नई सूची से पता चलता है कि लगभग समूचे बमोरी ब्लॉक में कथित बंधुआ मजदूरों की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। इसमें 30 से ज्यादा गांव बताए गए हैं, जहां के सहरिया आदिवासियों को कथित बंधुआ बनाकर रखा गया है। इनमें नोनेरा, खुशीपुरा, पटाई, सिमरोद, कालोनी, सिलावटी, हरिपुर, इटाखेड़ा, चक परासरी, विष्णुपुरा, चकरोदा, रंगपुरा, मूंदौल, चिलका, बागेरी, कंचनपुरा, ग्वारखेड़ा, देहरदा, खुशीपुरा, चक पारसखेड़ा, लालोनी, विनायक खेड़ी, श्यामपुरा, हिनोदा, कोटर, रुठियाई आदि शामिल हैं।

कर रहे कार्रवाई
मानवाधिकार आयोग ने पत्र लिखा है। इसके पालन में हम कार्रवाई कर रहे हैं। आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिनेश शुक्ला, एसडीएम

इस तरह के मामले समाज के लिए कलंक हैं:सुब्बाराव

वरिष्ट समाजसेवी एस सुब्बाराव ने दो दिन पहले कलेक्टर को पत्र लिखकर इस मामले की प्रोगेस पूछी है। उनके पत्र में लिखा गया है ऐसी घटनाएं समाज के लिए कलंक हैं। इसलिए इस मामले में प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना चाहिए। जिससे पीड़ित परिवारों को राहत मिल सके।

पुनर्वास के इंतजाम नहीं, इसलिए भेज दिया गांव
मोर्चा ने जिन मजदूरों को बंधुआ होने का दावा किया था। उन सभी को प्रशासन उनके गांव में भेज चुका है। प्रशासन इन्हें बंधुआ मानने को तैयार नहीं है। क्योंकि इन्हें बंधुआ घोषित करते ही प्रशासन के सामने भी संकट खड़ा हो जाएगा। उनका पुनर्वास करने से लेकर अन्य इंतजाम करने होंगे। इसके अलावा उन्हें सर्टिफिकेट भी जारी करना होंगे।

93 आदिवासियों के बयान भी दर्ज कराए
प्रशासन ने 93 आदिवासियों के बयान भी एक माह पूर्व दर्ज कराए जा चुके हैं। उनके मामले में भी कोई फैसला नहीं हुआ है। मोर्चा की मांग है कि उनके द्वारा सौंपी गई सूची पर प्रशासन जांच करे और आदिवासियों को बंधुआ मुक्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया जाए। इससे उनके पुनर्वास का काम हो सकेगा।

समाजसेवी एस सुब्बाराव ने कार्रवाई के लिए कलेक्टर को लिखा पत्र
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