छह साल में शून्य से 39 तक पहुंचा दिए टाइगर
चार साल के जिस फेज में मप्र ने टाइगर स्टेट का दर्जा खोया था, उन्हीं दिनों में देहरादून के वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट आई कि बुंदेलखंड की शान पन्ना टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में एक भी टाइगर नहीं बचा। आनन-फानन में चितूर (आंध्रप्रदेश) के रहने वाले और मप्र कैडर के आईएफएस अफसर आर श्रीनिवास मूर्ति को वहां भेजा गया।
काम को जुनूनी अंदाज में करने वाले मूर्ति ने पीटीआर की कमान संभाली और छह साल की अपनी पोस्टिंग के दौरान बाघों की संख्या ‘जीरो’ से 39 पहुंचा दी। मूर्ति जब तक पन्ना में रहे तब तक उन्हें देश के बड़े सम्मान मिले।
किसी ने ‘बाघ मित्र’ का उपनाम दिया तो कोई उन्हें ‘अर्थ हीरो’ कहने लगा। राज्य सरकार ने अब जाकर 7 फरवरी को उन्हें पुरस्कृत किया है।
यह उनके ही प्रयास हैं कि पन्ना जहां सामंती प्रवृत्ति के लोग शिकार को शौक मानते थे, अब वही उनकी सुरक्षा में मदद करते हैं। टाइगर टूरिज्म भी दो से तीन गुना हो गया। आज वहां 20 हजार पर्यटक हर साल आने लगे। अपनी 27 साल की सेवा में मूर्ति ने भोपाल अथवा दफ्तरी के काम सिर्फ 9 साल किए। 18 साल उन्होंने जंगलों में ही गुजारे।
लोगों ने रोका तो बच्चों-परिवारों को जोड़ा
शुरुआत के दिनों में सामंती लोगों ने रुकावट पैदा करने की कोशिश की तो मूर्ति ने ‘पन्ना नेचर कैंप’ प्रारंभ कर दिया। नवंबर से अप्रैल तक स्कूली बच्चों, परिवारों को जंगलों में ले गए और बताया कि टाइगर बुंदेलखंड का गौरव है। पहचान है। उसे बचाएं। इसके बाद फॉरेस्ट की इंटेलीजेंस और पुलिस ने भी मदद की।
ये सम्मान मिले
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने 2010 व 2014 में पन्ना टाइगर रिजर्व को उत्तम श्रेणी का सम्मान दिया। एनटीसीए ने ही 2012 व 2015 में अवार्ड दिया।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने 2011 में ‘बाघ मित्र’ का खिताब दिया।
रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) ने 2015 में ‘अर्थ हीरो’ पुरस्कार दिया।
सामंतियों ने कई बार अटकाए रोड़े
मई 2009 में पोस्टिंग के बाद बुंदेलखंड के सामंतियों ने राजनीतिक से लेकर प्रशासनिक दबाव बनाया। उप्र से आने वाले डकैतों ने भी परेशान किया। बाघ पुनर्स्थापना योजना के तहत नवंबर 2009 में पेंच से एक नर बाघ दिया गया। दो बाघिन भी। लेकिन दस दिन में ही नर बाघ पार्क से बाहर निकल गया। तभी कसम खाई कि यह नहीं होने देंगे कि पन्ना में 34 बाघ थे, जो अब नहीं है। यह संख्या अब 35 हो गई है। दोबारा नर बाघ को ढूंढा और पार्क में लाए। इसके बाद स्टाफ को साथ लेकर मॉनिटरिंग की। भोपाल के वन विहार से मादा बाघिन का यूरीन लेकर गए और जंगलों में जगह-जगह स्प्रे किया ताकि नर बाघ उसकी गंध पाकर वहीं रुक जाए इससे सफलता मिली।
और पार्क में मौजूद एक बाघिन के साथ मेटिंग होने से चार शावक पैदा हुए। यह सिलसिला फिर नहीं रुका। फिर इनकी सुरक्षा के लिए मूर्ति ने आम जनता, नेताओं और अन्य लोगों के समूहों से 200 बार बात की। एक-एक को 15 बार मिलकर समझाया। तब जाकर 2015 में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या 32 व पार्क के इर्द-गिर्द 7 हो गई।