ग्वालियर. मच्छर में मलेरिया पैरासाइट (प्लाज्मोडियम वाइवैक्स, प्लाज्मोडियम फेल्सीपेरम) विकसित होने का सबसे अनुकूल समय फरवरी अंत से अप्रैल तक होता है। इस समय तापमान 20 से 30 डिग्री रहता है। करीब 10 दिन में ही मच्छर में मलेरिया पैरासाइट डवलप हो जाता है जबकि सर्दी और अधिक गर्मी में यह पैरासाइट 30 से 40 दिन में विकसित होता है। इसलिए हमें इस मौसम में ही मलेरिया से बचाव शुरू कर देना चाहिए।
यह बात नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च दिल्ली से आए साइंटिस्ट डॉ. आरसी धीमान ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कही। वे बुधवार को आईटीएम यूनिवर्सिटी में एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होनेे के लिए शहर आए थे।
मलेरिया के मच्छर (मादा एनाफिलीज) घर के खुले ओवरहेड टैंक, निर्माणाधीन घर के खुले टैंक के पानी में सबसे जल्दी पनपते हैं। लोगों को चाहिए कि वह पानी ढंक कर रखें। हर सात दिन में पानी बदलें। इससे मच्छर नहीं पनपेंगे।
फाइलेरियेसिस के लक्षण
डॉ. धीमान ने बताया कि अंगुली सूजना फाइलेरियेसिस के शुरुआती लक्षण हैं। ऐसी स्थित में डॉक्टर से चेकअप कराना चाहिए। सही समय पर इलाज न होने की स्थित में आठ से दस साल बाद यह बीमारी बढ़ जाती है और व्यक्ति का पैर सूजकर काफी मोटा हो जाता है।
किट से घर पर ही चेक करें मलेरिया
बुखार सर्दी के साथ रह-रहकर आता है, साथ ही सिर में तेज दर्द होता है और बुखार तय समय के बाद बार-बार आकर उतर जाता है, तो यह लक्षण मलेरिया के हो सकते हैं। इसका पता मार्केट में उपलब्ध रेपिड डायग्नोस्टिक किट (आरडीके) से लगा सकते हैं। 25 से 50 रुपए में उपलब्ध इस किट में ब्लड की एक बूंद डालकर तीन से चार मिनट में मलेरिया टेस्ट किया जा सकता है। साथ ही मलेरिया के टेस्ट के लिए हाल ही में पॉलीमराइज चेंज रिएक्शन (पीसीआर) तकनीक भी विकसित हुई है। फिलहाल इसका उपयोग लैब में किया जा रहा है।
एलीज मच्छर से होता है डेंगू व चिकनगुनिया
डॉ. धीमान ने बताया कि फ्लॉवर पॉट का पानी पांच दिन में बदलें। वॉश बेसिन के पास पानी जमा न होने दें। यहां डेंगू के मच्छर (एलीज) पनपने की आशंका होती है। एलीज मच्छर के काटने से चिकनगुनिया और डेंगू होता है। डेंगू के शुरुआती लक्षण हड्डी में दर्द, स्किन पर रेशेज और सिर में तेज दर्द होना है।