ग्वालियर. जीवाजी यूनिवर्सिटी में उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी कर फेल छात्रा को पास करने और फर्जी मार्कशीट बनाने के मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी के गठन को कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने मंजूरी दे दी है। साथ ही गोपनीय विभाग में पदस्थ सभी नौ सर्विस प्रोवाइडर हटा दिए हैं। इसमें से एक मेडिकल शाखा में पदस्थ था। जांच कमेटी एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट कुलपति को सौंपेगी।
जेयू के करेक्शन सेल में कार्यरत प्रशांत दुबे पर आरोप है कि उन्होंने वीआरजी कॉलेज मुरार की बीएससी की छात्रा प्रियंका नरवरिया से रुपए लेकर उसे पांचवें सेमेस्टर में फर्जी तरीके से पास कर दिया और फाइनल सेमेस्टर की नकली मार्कशीट बना दी। पांचवें सेमेस्टर की फर्जी मार्कशीट तैयार कर बीएससी के इंचार्ज बृजभान भदौरिया के साइन करा लिए।
बीएससी फाइनल की मार्कशीट भी तैयार कर ली। फाइनल की मार्कशीट के साथ पांचवें सेमेस्टर की फर्जी मार्कशीट की फोटोकॉपी अधीक्षक हरीश शर्मा के पास साइन के लिए भेज दी। लेकिन अधीक्षक को शंका हुई और मामले का खुलासा हो गया।
इसके बाद कुलपति ने ज्वाइंट प्रॉक्टर प्रो. राधा तोमर, भौतिक शास्त्र के प्रो. यूपी वर्मा और गणित की प्रो. रेनू जैन के नेतृत्व वाली जांच कमेटी को मंजूरी दे दी है। जांच कमेटी की पहली बैठक मंगलवार को होगी।
छात्रा से होगी पूछताछ
वीआरजी कॉलेज मुरार की बीएससी की छात्रा प्रियंका ने मार्कशीट किसके माध्यम से बनवाई है, यह जानने के लिए जेयू प्रशासन की जांच कमेटी प्रियंका से पूछताछ करेगी। साथ ही उसका पक्ष भी जानेगी।
कर्मचारियों ने कहा- ये साइन हमारे नहीं हैं
प्रियंका की पांचवें सेमेस्टर की मार्कशीट में चेकर के तौर पर कर्मचारी अनिल जामदार और चेतन राजौरिया के साइन हैं। इन कर्मचारियों ने जांच किए बिना मार्कशीट पर साइन क्यों किए, यह जांच का विषय है। चुनाव ड्यूटी से लौटने के बाद उक्त दोनों कर्मचारियों ने परीक्षा नियंत्रक से कहा कि मार्कशीट पर उनके साइन नहीं हैं। ये साइन प्रशांत दुबे ने फर्जी ढंग से बनाए हैं।
शर्मा एजेंसी को भी नोटिस
जेयू प्रशासन ने सर्विस प्रोवाइडर रखने वाली शर्मा एजेंसी को भी नोटिस जारी किया है। इसमें एजेंसी द्वारा रखे गए कर्मचारियों की गोपनीय जानकारी और नियुक्ति पत्र मांगा गया है। एजेंसी को दो दिन में जवाब देना है।