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बिजली कंपनी के अफ

5 वर्ष पहले
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ग्वालियर डीबी स्टार

बिजली कंपनियों की सालाना बैलेंस शीट के आधार पर विद्युत नियामक आयोग बिजली का टैरिफ तय करता है। बिजली कंपनियों प्रतिवर्ष स्वयं को घाटे में दिखाती हैं, जबकि असल में कमीशनबाजी की खरीद और सेटिंग के कनेक्शनों से यह व्यवस्था बिगड़ रही है। कंपनी के अफसर बड़े उपभोक्ताओं से वसूली ही नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर घरेलू और कॉमर्शियल उपभोक्ताओं पर पड़ता है। ऐसे उपभोक्ताओं को कभी आंकलित, तो कभी ज्यादा खपत के बिल बनाकर दे दिए जाते हैं।

हबिजली कंपनी के अफसर बड़े उपभोक्ताओं से इसलिए भी वसूली नहीं करते, क्योंकि उनके बिल पर मोटा सरचार्ज लगाया जाता है। अगर किसी उपभोक्ता पर 50 लाख रुपए की वसूली है, तो उसके बिल पर हर माह एक प्रतिशत सरचार्ज लगाया जाता है। ऐसे में बिजली कंपनी को पांच हजार रुपए तक मिलते हैं।

नहीं मिल सकता दूसरा कनेक्शन
बिजली कंपनी के नियम के मुताबिक बिल बकाया होने की स्थिति में एक ही परिसर में दूसरा कनेक्शन नहीं दिया जा सकता है। अगर कोई व्यक्ति उसी परिसर पर किसी दूसरे नाम से कनेक्शन लेना चाहे, तो भी उसे पहले बिल का बकाया जमा करना होगा।

हम वसूली करते हैं
हम लगातार वसूली अभियान चलाते हैं। किसी भी उपभोक्ता के साथ कोई भेदभाव नहीं होता। मैं बड़े बकाएदारों की जानकारी लेता हूं। ऐसे उपभोक्ताओं के खिलाफ भी अभियान चलाकर वसूली कराई जाएगी। विवेक पोरवाल, एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी

बड़े बकाएदारों के आगे बेबस हुई विद्युत वितरण कंपनी
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