एक भवन में चल रहे कई कॉलेज
कॉलेजों को बिना निरीक्षण मान्यता नहीं
अब सुविधाविहीन कॉलेजों को नए कोर्स खोलने के लिए उच्च शिक्षा विभाग मान्यता नहीं देगा। फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने इस बार लीड कॉलेजों के माध्यम से नए कोर्स खोलने वाले कॉलेजों का निरीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसे कॉलेजों का निरीक्षण लीड कॉलेज के प्रिंसिपल समिति बनाकर करेंगे।
निरीक्षण के दौरान वीडियोग्राफी बनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भवन विहीन कॉलेज फर्जीवाड़ा कर मान्यता नहीं ले सकें। अंचल में 17 कॉलेजों ने नए कोर्स खोलने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में आवेदन किया है। ऐसे कॉलेजों ने पीजीडीसीए, एमएससी, बीए, बीकॉम, बीएससी व लॉ कोर्स की मान्यता के लिए उच्च शिक्षा विभाग में आवेदन किया है।
सभी मानकों को पूरा करने वाले कॉलेजों को ही दी जाएगी नए सत्र से संबद्धता
नए सत्र से मानकों को पूरा करने वाले कॉलेजों को ही संबद्धता प्रदान की जाएगी। इसके लिए कॉलेजों को पहले से ही आगाह कर दिया गया है। प्रो. डीडी अग्रवाल, डीसीडीसी,जेयू
छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा दिलाने शासन ने की कड़ाई
दरअसल अभी तक उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता देने के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही थी। जिन प्रिंसिपलों को निरीक्षण की जिम्मेदारी दी जाती थी, वह कॉलेज में ही बैठकर कागजी खानापूर्ति कर प्रतिवेदन रिपोर्ट तैयार करवा लेते थे, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो पाएगा। नया कोर्स खाेलने के लिए प्रदेश के जिन कॉलेजों ने आवेदन किया है, उनमें उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी विभाग द्वारा विशेष फॉर्मेट में निरीक्षण कर भरना है। साथ ही निरीक्षण की वीडियो रिकॉर्डिंग सीडी भी विभाग ने मांगी है। इतना ही नहीं विभाग ने निर्देश में कहा कि समितियों द्वारा किए गए निरीक्षण को विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाएगा। जेयू से संबद्ध कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है लेकिन शिक्षा के स्तर में गिरावट आ रही है।
अंचल के अधिकांश निजी कॉलेज ऐसे हैं, जिनके पास भवन का अभाव है। एक भवन में 2 से 3 कॉलेज चल रहे हैं। जिस कोर्स के लिए निरीक्षण समितियां पहुंचती हैं उसी के अनुसार कॉलेज संचालक बोर्ड लगा देते हैं। सबसे अधिक फर्जीवाड़ा बीएड व नर्सिंग कॉलेजों में हैं। ऐसे कॉलेज सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं। छात्रों को सिर्फ एडमिशन व परीक्षा के समय बुलाया जाता है। बाकी पूरे साल कॉलेज में ताला पड़ा रहता है। इस बात का खुलासा जेयू द्वारा कराए गए निरीक्षण में भी हो चुका है। लेकिन संचालकों की पहुंच के चलते ऐसे कॉलेजों के खिलाफ जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन भी कार्रवाई नहीं कर पाता। हालांकि जेयू का कहना है कि इस बार मान्यता के मानकों को पूरा करने वाले कॉलेजों को ही संबद्धता प्रदान की जाएगी।