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आलोक मिश्रा ने नि

4 वर्ष पहले
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इसलिए सख्त हुआ यूजीसी
सर्कुलर में लिखा है कि ऑफ कैंपस कोर्स के कारण यूनिवर्सिटी इस बात की निगरानी नहीं कर पाती कि सेंटर पर कोर्स पढ़ाने के लिए व्यवस्थित फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर है या नहीं। इससे शिक्षा का स्तर गिर रहा है। ऐसे सर्टिफिकेट छात्रों की योग्यता में कोई बढ़ोतरी नहीं कर रहे हैं। इसी कारण ऐसे कोर्स सिर्फ विश्वविद्यालय में ऑन कैंपस ही संचालित होना चाहिए। ऑफ कैंपस नहीं।

आलोक मिश्रा ने निजी विश्वविद्यालय से ऑफ कैंपस पीजीडीसीए कोर्स कर राज्य शिक्षा केंद्र की लेखापाल की नौकरी के लिए आवेदन किया। केंद्र की दस्तावेज परीक्षण समिति ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया कि यह कोर्स मेन कैंपस में होना चाहिए

केस -2
सपना चौहान ने भी निजी विश्वविद्यालय के स्टडी सेंटर से पीजीडीसीए डिप्लोमा लिया। इसी के सहारे वे राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा भरे जाने वाले संविदा लेखापाल के पदों की भर्ती में बैठी थीं। पता चला ऑफ कैंपस कोर्स के कारण उनका आवेदन खारिज किया गया है।

प्रदेश सरकार को संज्ञान लेना चाहिए
यूजीसी के नियम से दोनों पाठ्यक्रम ऑन कैंपस ही संचालित हो सकता है। सभी विश्वविद्यालयों को गाइडलाइन फॉलो करना चाहिए। यदि डीसीए और पीजीडीसीए ऑफ कैंपस चल रहे हैं, तो यह गलत है। विश्वविद्यालय संबंधित राज्य सरकार के अधीन काम करते हैं, लिहाजा सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। यूजीसी भी इस मामले में एक्शन लेगी।  प्रशांत द्विवेदी, एजुकेशन ऑफिसर, यूजीसी

छात्रों का नुकसान नहीं होने देंगे
ग्वालियर, रीवा और खंडवा आदि स्टडी सेंटर्स पर डीसीए, पीजीडीसीए होता है। यह सही है कि यूजीसी ने गाइडलाइन जारी कर रखी है। इसके बाद ऑफ कैंपस कोर्स नहीं हो सकते। जहां तक हमारा सवाल है तो हम अपने रेग्युलेशन के हिसाब से ही कोर्स करवा रहे हैं। छात्रों के सर्टिफिकेट अमान्य होने की शिकायत नहीं मिली है। छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।  दीपक शर्मा, रजिस्ट्रार, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय

ग्वालियर/भोपाल डीबी स्टार

डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन (डीसीए) और पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लीकेशन (पीजीडीसीए) में विद्यार्थियों से धोखा हो रहा है। प्राइवेट कम्प्यूटर सेंटर मान्यता नहीं होने पर भी दोनों के रेग्युलर सर्टिफिकेट दे रहे हैं, जबकि यूजीसी से इसकी इजाजत नहीं है। आयोग ने वर्ष 2013 से ही ऐसे पाठ्यक्रमों को रेग्युलर मोड में चलाने पर रोक लगा रखी है। विश्वविद्यालय अपने कैंपस में ही डिप्लोमा करवा सकते हैं।

सरकारी नौकरी की चाह में मोटी रकम देकर डीसीए और पीजीडीसीए करने वाले बेरोजगार घूम रहे हैं। उनके सर्टिफिकेट और डिप्लोमा सरकारी विभागों में मान्य ही नहीं हैं। पटवारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनोग्राफर और सहायक ग्रेड-3 जैसी अनेक कम्प्यूटर आधारित नौकरियों में डीसीए और पीजीडीसीए कोर्स अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता है। इसी उम्मीद में हर साल बड़ी संख्या में बेरोजगार युवा ये कम्प्यूटर कोर्स करते हैं।

फीस चुकाकर भी डिग्री बेकार: यूजीसी ने 2013 में नया नियम लागू किया है। उसके मुताबिक विश्वविद्यालय अपने कैंपस में ही ये कोर्स करवा सकते हैं। उनसे संबद्ध सेंटर्स को रेग्युलर मोड में कोर्स की अनुमति नहीं है। जब छात्र-छात्रा डीसीए, पीजीडीसीए का सर्टिफिकेट लेकर सरकारी नौकरी में आवेदन करता है, तो 20 हजार रुपए देने के बावजूद शिक्षित युवा बेरोजगार ही रहता है।

सरकारी नौकरी के लिए ऐसे प्रमाण-पत्र नहीं हैं मान्य
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