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10 का टिकट वसूली ‌Rs.140

5 वर्ष पहले
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टिकट फर्जीवाड़े में जब्त दस्तावेज की जांच के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जन साधारण टिकट बुकिंग सेवा (जेटीबीएस) पर यात्रियों को 10 रुपए के टिकट पर 140 रुपए तक वसूले जा रहे थे। मामले के खुलासे के बाद जेटीबीएस संचालक फरार हो गया है। वहीं इस मामले में अभी एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है।

शहर में यात्रियों की सुविधाओं के नाम पर चल रहे जेटीबीएस रेलवे को हर माह लाखों रुपए का चूना लगा रहे हैं। शनिवार रात बॉम्बे ट्रैवल्स द्वारा संचालित जेटीबीएस पर छापे के बाद इस बात का खुलासा हुअा। जेटीबीएस संचालक कम दूरी का ब्लैंक टिकट पहले ही काट लेते थे। इसके बाद यात्री को दूसरा कार्बन कापी वाला प्रिंट थमा देते थे। ऐसे टिकट पर जेटीबीएस संचालक एक टिकट पर यात्री से 200 से लेकर 300 रुपए तक अधिक वसूल लेते थे।

आरपीएफ ने नहीं की कोई कार्रवाई: बरामद दस्तावेज को लेकर डीसीअाई अनिल श्रीवास्तव, चीफ बुकिंग सुपरवाइजर एके सक्सेना जब मामले की कायमी के लिए आरपीएफ थाने पहुंची तो स्टाफ ने कार्रवाई करने से इंकार कर दिया। आरपीएफ स्टाफ ने कॉमर्शियल विभाग को यह लिखकर टरका दिया कि केस जीआरपी या जिला पुलिस की कार्रवाई का है। वहीं पैन इंडिया ड्राइव के तहत इस तरह के मामलों आरपीएफ को कॉमर्शियल विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई करना थी। रेलवे बोर्ड ने इसको लेकर सख्त निर्देश जारी कर रखे हैं। इसके बाद भी आरपीएफ ने कॉमर्शियल विभाग का कोई सहयोग नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि शहर संचालित अधिकांश जेटीबीएस पर एेसी ही गड़बड़ी है लेकिन आरपीएफ का सहयोग नहीं मिलने के कारण कॉमर्शियल विभाग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा।

ऐसे समझें फर्जीवाड़े का गणित
सबसे पहले जेटीबीएस संचालक कम दूरी का खाली टिकट निकाल लेते थे। ऐसे कई टिकट जेटीबीएस संचालक पहले से ही निकाल कर रख लेता था। इसके बाद जब कोई यात्री भोपाल, दिल्ली, मुंबई और कहीं लंबी दूरी का टिकट मांगता है तो असली टिकट के पीछे कार्बन लगाकर ब्लैंक टिकट रखकर प्रिंट कर लेते हैं, जिससे न तो फर्जी टिकट यात्री की पकड़ में आता है न ही चेकिंग स्टाफ की। इस तरह जेटीबीएस संचालक हर माह लाखों रुपए का हेर-फेर कर रहे हैं।

सीसीआई ने जांच में पकड़ी गड़बड़ी
गुरुवार को समता एक्सप्रेस से में चेकिंग करते हुए जा रहे मुरैना सीसीआई (चीफ कॉमर्शियल इंस्पेक्टर) नरवर सिंह की सूझबूझ से इस फर्जीवाड़े का खुलासा हो सका। समता एक्सप्रेस में सवार तीन यात्रियों के पास टीटीई प्रदीप श्रीवास को ग्वालियर से भोपाल के दो टिकट मिले। इनमें 26198537 नंबर का टिकट 12.17 बजे जारी हुआ था। जबकि सीरियल नंबर 26198536 टिकट 12.23 बजे जारी हुआ। साथ ही प्रिंट की क्वालिटी में भी गड़बड़ी है। गड़बड़ी का संदेह होने पर उन्होंने सीसीआई श्री सिंह को इसकी जानकारी दी। श्री सिंह ने टिकट जब्त करते हुए तीनों यात्रियों को फ्री टिकट जारी कर दिया।

दस्तावेज की जांच के बाद हुआ खुलासा
शनिवार को रेलवे के कॉमर्शियल विभाग की टीम ने स्टेशन बजरिया स्थित बांबे ट्रैवल्स द्वारा संचालित जेटीबीएस पर छापा मारा। इस जेटीबीएस का ठेका रेलवे ने अश्विनी जैन को दे रखा है। यहां से जब टीम ने दस्तावेज की जांच की तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इस जेटीबीएस से भोपाल के टिकट जारी हुए थे वे असल में ग्वालियर से नौनेरा (भिंड लाइन का एक स्टेशन) के थे। इस टिकट पर जो नंबर था वह नौनेरा के लिए जारी हुआ था। बरामद टिकटों का मूल कीमत 30 रुपए था, जबकि गड़बड़ी कर बनाए गए टिकटों पर जेटीबीएस संचालक ने 420 रुपए वसूल किए थे।

कोई दस्तावेज नहीं दिए
रेलवे के कॉमर्शियल विभाग ने इस मामले में किसी भी तरह के कोई दस्तावेज नहीं दिए हैं। रेलवे द्वारा दस्तावेज मिलते ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -प्रकाश सेन, डीआई, जीआरपी

जांच रिपोर्ट झांसी भेजी

आपने जो मामला बताया है वो पूरी तरह से सही है। टिकटों में हेर फेर कर गड़बड़ी की जा रही थी। इस मामले की जांच रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। इस बारे में मैं कुछ भी बताने के लिए अधिकृत नहीं हूं। -नटवर सिंह, सीसीआई, मुरैना

कारावास हो सकता है

इस मामले में धारा 406, 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज होना चाहिए। इन धाराओं के तहत 10 साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही न्यायालय अर्थ दंड की सजा भी देगा। -अवधेश सिंह भदौरिया, अधिवक्ता, मप्र हाईकोर्ट

कार्रवाई का अधिकार नहीं

इस मामले में आईपीसी की धारा लगेंगी। इसका अधिकार आरपीएफ के पास नहीं है। इस तरह के मामलों में कार्रवाई का अधिकार जीआरपी या जिला पुलिस को है। -टीके अग्निहोत्री, डीआई, आरपीएफ

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