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5 वर्ष पहले
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ग्वालियर डीबी स्टार

धर्मेंद्र कुशवाह एनकाउंटर व पड़कौली कांड की जांच के लिए गठित न्यायिक जांच आयोग के कर्मचारी हर पल खतरे में हैं। आयोग का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कर्मचारियों को मूल विभाग में वापस नहीं भेजा गया है। इस कारण कर्मचारी फालतू बैठे हैं, लेकिन उनको बिना काम के वेतन दिया जा रहा है। अगर हिसाब लगाएं, तो हर रोज 10 हजार रुपए न्यायिक जांच आयोग के नाम पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि अभी आयोग किसी भी मामले की जांच नहीं कर रहा है। जिस हॉल में कर्मचारी बैठते हैं, वहां की छत की पटिया क्रेक हो गई हैं। इस कारण अफसरों ने पटियों को सपोर्ट देने के लिए 30 फीट का लोहे का स्टूल बनवा कर फिट करवा दिया है।

धर्मेंद्र कुशवाह एनकाउंटर की जांच खत्म हो गई है, वहीं पड़कौली कांड की जांच शुरू नहीं हो पाई है। इसी बीच दिसंबर 2016 में आयोग की अवधि खत्म हो गई। न्यायिक जांच आयोग का गठन जुलाई 2015 में किया गया था। नवंबर 2015 में स्टाफ मिला तथा धर्मेंद्र कुशवाह एनकाउंटर सहित पड़कौली कांड की जांच के लिए कैबिनेट की स्वीकृति के बाद न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया। आयोग का अध्यक्ष सीपी कुलश्रेष्ठ व सचिव प्रोफेसर डीपी शर्मा को बनाया गया। इसके अलावा लेखापाल से लेकर अन्य स्टाफ भी स्वीकृत किया गया।

कैबिनेट को भेजा है प्रस्ताव
न्यायिक जांच आयोग की अवधि खत्म हो गई है। अवधि बढ़ाने के लिए कैबिनेट को प्रस्ताव भेजा गया है। अभी प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिली है। जहां तक जांच की बात है, तो धर्मेंद्र कुशवाह एनकाउंटर की जांच हम पूरी कर रिपोर्ट शासन को सौंप चुके हैं। पड़कौली कांड की जांच भी शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों के फालतू बैठने की बात मुझे नहीं मालूम है।  सीपी कुलश्रेष्ठ, अध्यक्ष न्यायिक जांच आयोग

यह है आयोग का स्टाफ और वेतन के आंकड़े
नाम पद वेतन मूल विभाग

सीपी कुलश्रेष्ठ अध्यक्ष 70 हजार रिटायर्ड एडीजे

प्रो. डीपी शर्मा सचिव 1 लाख उच्च शिक्षा विभाग

प्रेम नारायण चौरसिया लेखापाल 22 हजार आयुष विभाग

एच एस बिलारिया सहायक वर्ग-3 20 हजार जल संसाधन विभाग

महेंद्र हिंडोलिया सहायक वर्ग-3 15 हजार स्कूल शिक्षा विभाग

संजीव शर्मा प्यून 15 हजार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग

हीरालाल भगत प्यून 15 हजार कला एवं संस्कृति विभाग

30 फीट ऊंचे स्टूल के सहारे जान बचाकर बैठा है आयोग का स्टाफ
आयोग के कार्यालय में पटियों को सपोर्ट देने के लिए लगाया गया स्टूल।

फालतू बैठे हैं ऑफिस में
आयोग की अवधि दिसंबर 2016 में खत्म हो गई है। फिलहाल आयोग में अभी कोई काम नहीं हैै। हम लोग पूरा दिन फालतू बैठकर गुजारते हैं। अध्यक्ष सीपी कुलश्रेष्ठ व सचिव डीपी शर्मा कभी-कभी यहां चक्कर लगाने अा जाते हैं। जिस हॉल में हम बैठते हैं, उसकी हालत खराब है। लोहे के 30 फीट के स्टूल द्वारा टूटी पटिया फिक्स की गई है। कभी भी हमारे साथ हादसा हो सकता है। सरकार आयोग के नाम पर फालतू पैसा बर्बाद कर रही है। विनय श्रीवास्तव, कर्मचारी न्यायिक जांच आयोग परिवर्तित नाम

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