अनिल पटैरिया
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस की पेंट्री कार में 28 वेंडरों के पास फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट मिले। जांच के दौरान बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी पीके सरदार ने सीसीआई को लिखित में दिया कि ये सर्टिफिकेट रेलवे अस्पताल से जारी नहीं हुए। इन पर सेवानिवृत्त रेलवे डॉक्टर मदन मोहन पाठक के स्केन किए फर्जी हस्ताक्षर मौजूद हैं। ये सभी वेंडर रूप कैटरर्स के हैं।
अनिल पटैरिया ग्वालियर
गत जनवरी माह में रेलवे अफसरों की दो कार्रवाइयों से जाली मेडिकल सर्टिफिकेट का फर्जीवाड़ा सामने आया है। इन मेडिकल सर्टिफिकेट से ही वेंडरों की पहचान होती है।
छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में 28 और ग्वालियर में 12 अवैध वेंडरों के पास फर्जी सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब जांच की सुई रेलवे अफसरों की तरफ घूम चुकी है। बिलासपुर व झांसी मंडल के अफसर अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिर इन वेंडरों को तयशुदा फॉर्मेट पर डॉक्टर के सील-सिक्के लगाकर सर्टिफिकेट किसने जारी किए। जांच का बिंदु यह भी है कि आखिर अभी तक स्टेशन व ट्रेनों में हेल्थ इंस्पेक्टर, आरपीएफ व जीआरपी ऐसे वेंडरों को क्यों नहीं पकड़ पाए। इसके लिए ग्वालियर से हेल्थ इंस्पेक्टर तेजपाल, डिप्टी एसएस कॉमर्शियल वाईके मीना, आरपीएफ थाना प्रभारी टीके अग्निहोत्री इलाहाबाद बुलाया था।
वेंडर इन्हीं सर्टिफिकेट के सहारे ट्रेनों में काम कर रहे थे।
बिलासपुर रेलवे अस्पताल का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट।
रेलवे में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट के पेंट्री वेंडर
DB Star investigation
केस-1
केस-2