सिंहस्थ बिगाड़ेगा स्वास्थ्य सेवाएं
उज्जैन में शुरू हो रहे सिंहस्थ से अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि जेएएच हो या मानसिक आरोग्यशाला या फिर स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल, सभी जगह से 66 डॉक्टर्स की ड्यूटी महाकुंभ में लगाई गई है।
जेएएच के ट्रॉमा सेंटर से ही 5 विशेषज्ञ लिए गए हैं। पॉली क्लीनिक लधेड़ी की हालत तो और भी खराब है। यहां कहने को तो 5 डॉक्टर हैं,जिसमें से 4 डॉक्टर 3 दिन यहां और 3 दिन दूसरे अस्पताल में सेवाएं देते हैं। सिर्फ 1 डॉक्टर डॉ. आदर्श महेश शुक्ला ही यहां मिलते हैं। उनकी भी ड्यूटी सिंहस्थ में लग जाने से यहां आने वाले मरीजों का क्या होगा इसका अनुमान खुद ही लगाया जा सकता है। शहर में जिला अस्पताल से लेकर सभी अस्पतालों में डॉक्टरों की पहले से ही कमी चल रही है, उस पर ग्वालियर जिले से ही 8 डॉक्टर जब उज्जैन चले जाएंगे तो स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित होंगी। अधिकारियों का कहना है कि वह इस बारे में क्या कर सकते हैं, शासन का आदेश है।
उज्जैन में सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रदेश भर से डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। ये डॉक्टर 6 अप्रैल से 23 मई तक उज्जैन में अपनी सेवाएं देंगे। सिंहस्थ में डॉक्टरों की ड्यूटी तो लगा दी गई, लेकिन ड्यूटी लगाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा गया कि इन डॉक्टरों के जाने के बाद उन अस्पतालों की व्यवस्थाओं का क्या होगा जहां ये पदस्थ हैं। जेएएच के ट्रॉमा सेंटर से सभी 5 विशेषज्ञों की ड्यूटी लगाई गई है। ये विशेषज्ञ हैं डॉ. घनश्याम वर्मा, डॉ. नेशॉन ओल्याई, डॉ.पीके तिवारी, डॉ. हंसमुखी शाक्य और डॉ. अवतार सिंह। इन डॉक्टरों के जाने के बाद यहां सिर्फ मेडिकल ऑफिसर ही रह जाएंगे। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग के 223 डॉक्टर में से 45 डॉक्टर ग्वालियर-चंबल संभाग के हैं। सबसे ज्यादा 13 डॉक्टर भिंड से और सबसे कम 1 डॉक्टर श्योपुर से लिया गया है। ग्वालियर से 8 डॉक्टर सिंहस्थ में जाएंगे। जीआरएमसी के 15 और मानसिक आरोग्यशाला के 6 डॉक्टर लिए गए हैं। आरोग्यशाला में 6 मनोरोग विशेषज्ञ हैं जिसमें से 4 की ड्यूटी सिंहस्थ में लगी है। यदि ये चारों डॉक्टर चले जाते हैं तो आरोग्यशाला की व्यवस्था तो मनोरोग विशेषज्ञों के भरोसे रह जाएगी।
6 माह पहले मरे डॉक्टर की भी लगा दी ड्यूटी
सिंहस्थ में ड्यूटी लगाते समय यह भी ध्यान नहीं दिया गया कि जिस डॉक्टर की ड्यूटी लगाई जा रही है वह जीवित है या नहीं। सिंहस्थ में जिन डॉ. अरुण कुमार कुमरा की ड्यूटी लगाई गई है उनकी मृत्यु 23 जुलाई 2014 हो चुकी है।
जो हैं उन्हीं की सेवाएं लेंगे
जो डॉक्टर हैं उन्हीं की सेवाएं ली जाएगी। कोशिश यह रहेगी कि मरीज परेशान न हो। डॉ.डीडी शर्मा, सिविल सर्जन
जो डॉक्टर हैं उन्हीं से अस्पताल की व्यवस्थाएं संचालित करेंगे। साथ ही शासन को यह भी अवगत करा रहे हैं कि डॉ. अरुण कुमार कुमरा का निधन हो चुका है। डॉ. जेएस सिकरवार, अधीक्षक, जेएएच समूह