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ज्यादा मजदूरी के लालच में दिखाई थी फर्जी आईडी

5 वर्ष पहले
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एयरफोर्स स्टेशन मेंं पकड़े गए असगर ने 100 रुपए ज्यादा मजदूरी के लालच में फर्जी आईडी दिखाई थी, क्योंकि उस समय उसकी स्वयं की आईडी उसके पास नहीं थी। पकड़े गए एक युवक का भाई पहले से ही एयरफोर्स स्टेशन में मजदूरी कर रहा है। एयरफोर्स के महाराजपुरा स्टेशन मेंं घुसने की कोशिश करते पकड़े गए युवकों से पुलिस की विशेष शाखा अधिकारियों ने मंगलवार को पूछताछ की। पूछताछ के लिए आईबी के अधिकारियों के पहुंचने की भी सूचना है।

दोनों आरोपियों को दो दिन की रिमांड पर लिया गया है। पकड़े गए युवकों के पास जिन युवकों की आईडी मिली वह इन्हीं के साथ द्वारिकापुरी पुरानी छावनी में रहते हैं।

एएसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि पकड़े गए असगर का भाई मुख्तयार खान एयरफोर्स में ही मजदूरी करता है। जिस समय असगर पकड़ा उस वक्त भी मुख्तयार काम पर गया था और आज भी काम कर रहा है। असगर बिना आईडी पर 250 रुपए की मजदूरी पर काम करता था। स्टेशन पर किसी व्यक्ति ने असगर से कहा था कि यदि वह आईडी ले आए तो उसे 350 रुपए की मजदूरी मिल सकती है। 100 रुपए के लालच में असगर गांव से अपनी आईडी आने का इंतजार किए बिना अपने पड़ोसी सतीश तोमर की आईडी लेकर स्टेशन पहुंच गया। सतीश की उम्र 22 वर्ष और असगर की 45 वर्ष है।

अपनी आईडी हाथ में, आगे वाले का नाम बता कर फंसा

फिरोज के पास स्वयं का आधार कार्ड था, लेकिन एंट्री के दौरान उसने अपना नाम अरविंद बताया। मजदूरों से पूछताछ में आईडी वाले मजदूर को 100 रुपए ज्यादा भुगतान के फंडे ने सवाल खड़ा कर दिया है। असगर व फिरोज, जिस सतीश व अर्जुन की आईडी का इस्तेमाल कर रहे थे, उनकी तस्दीक के लिए पुलिस पार्टी माता का पुरा जाएगी।

संदेह की सूची में ये तथ्य
जब फिरोज के पास स्वयं का आईडी था तो उसने अरविंद का नाम क्यों लिया?

बिना आईडी के प्रवेश पर पाबंदी है तो फिर 250 रुपए और 350 रुपए के मेहताने के दोहरे मापदंड क्यों?

दूसरे का आईडी प्रयोग कर मजदूरी करने की छूट किसके आदेश पर दी गई?

अभी तक ठेकेदार से पूछताछ क्यों नहीं की गई?

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