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ट्रकों में ओवरलोड माल ले जाने के मामले में क्या कार्रवाई की, कलेक्टर, एसपी शपथपत्र दें: कोर्ट

5 वर्ष पहले
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गौशाला में गायों के लिए चारा, पानी व रहने की उचित व्यवस्था की जाए
गौशाला में गायों के लिए चारा,पानी और रहने की उचित व्यवस्था की जाए। गायों की अच्छी देखभाल की जाए। यह आदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मंगलवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नगर निगम को दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि गौ सेवा के लिए नगर निगम के चुने हुए सदस्यों और सामाजिक संस्थाओं से भी मदद ली जा सकती है। जस्टिस यूसी माहेश्वरी व जस्टिस एसके गुप्ता की डिवीजन बेंच में गौशाला की बदहाली को लेकर दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजमणी बंसल ने तर्क रखा कि गौशाला में गायों को सिर्फ एक समय का खाना दिया जाता है। साथ ही रहने के लिए उचित शेड की व्यवस्था भी नहीं है। उन्होंने उक्त मामले में गौ पालन एवं पशुधन संवंर्धन बोर्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी पार्टी बनाने का आग्रह किया।

याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में नगर निगम आयुक्त अनय द्विवेदी व अपर आयुक्त एमएल दौलतानी ने तर्क रखा कि गौशाला में एक शेड का काम चल रहा है। इसमें लगभग 600 गाय आ जाएंगी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि गायों की संख्या ज्यादा है। इसलिए दो टीन शेड और बनाए जाएं। साथ ही गौ संवर्धन बोर्ड को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। कोर्ट में न्यायमित्र विवेक खेड़कर ने तर्क रखा कि उनके पास कुछ समाजसेवी संस्थाएं आईं हैं,जो सेवा के लिए बीमार गाय मांग रही हैं। कोर्ट में शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता अरविंद दूदावत व नगर निगम की ओर से अधिवक्ता दीपक खोत ने पैरवी की। काेर्ट में सुनवाई के दौरान प्रभारी कलेक्टर एडीएम शिवराज वर्मा, ज्वाइंट कलेक्टर अजयदेव शर्मा,एसडीएम महीप तेजस्वी उपस्थित रहे।

प्रतिदिन एक लाख का बजट स्वीकृत

गायों की देखरेख के लिए प्रतिदिन एक लाख से अधिक का बजट स्वीकृत है। नगर निगम गौशाला के लिए चार करोड़ रुपए सालाना का बजट देती है। इसमें चार हजार गायों की देखरेख की जानी है।

ग्वालियर| ट्रकों में ओवरलोड माल ले जाने के खिलाफ हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। जस्टिस आरएस झा व जस्टिस एमके मुदगल की डिवीजन बेंच ने याचिका पर सुनवाई के बाद ग्वालियर व मुरैना के कलेक्टर और एसपी से दो सप्ताह में शपथ पत्र पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने पूछा है, ओवर लोडिंग मामले में प्रशासन ने कितनी और क्या कार्रवाई की है। ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि ट्रकों में गलत रूप से ओवरलोडिंग की जा रही है। वहीं टोल टैक्स जुर्माना लेकर ओवर लोड वाहन को जाने की अनुमति दे देते हैं, जो कि नियम विरुद्ध है। साथ ही ओवर लोड वाहन चलाने के कारण सड़कों की हालत भी काफी खराब हो रही है। विधि अनुसार ज्यादा भरे हुए माल को ट्रक से उतार कर गोदाम में सुरक्षित रखना चाहिए। इस सामान को अन्य वाहन से ही निकाला जाना चाहिए। कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद ग्वालियर और मुरैना के कलेक्टर, एसपी और संबंधित अधिकारियों से दो सप्ताह में शपथ पत्र पर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सर्वेश शर्मा ने पैरवी की।

जल संसाधन के प्रमुख सचिव जुलानिया कोर्ट में पेश हुए
ग्वालियर |जल संसाधन विभाग के कर्मचारी को रेगुलर पे स्केल नहीं दिए जाने के मामले में दायर अवमानना याचिका में कोर्ट के आदेश पर जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव उपस्थित होने के लिए कोर्ट आए। लेकिन आज उक्त मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव आरएस जुलानिया को अगली सुनवाई 19 फरवरी को उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता सतीश शर्मा जल संसाधन विभाग में दैनिक वेतन भाेगी कर्मचारी हैं। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई के बाद कर्मचारी को रेग्युलर पे स्केल देने के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ शासन ने सुप्रीम कोर्ट में भी एसएलपी दायर की,जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कर्मचारी को राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट ने पूर्व में सुनवाई के दौरान जुलानिया को कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश दिए थे।

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