कर्म सिद्धांत समझने वालों का जीवन सफल:मुनिश्री
कर्म सिद्धांत समझने वाले का जीवन सफल हो जाता है। परिग्रह की पकड़ पाप का कारण है। चिंता न करते हुए चिंतन करना चाहिए। इससे जीवन की शैली बदल जाती है। यह विचार मुनिश्री यशोधर सागर महाराज ने मंगलवार को मामा का बाजार स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा परिग्रह पाप का मुख्य कारण है। भाव व द्रव्य परिग्रह से मनुष्य को सदैव बचना चाहिए। मोह के विसर्जन के बिना जीवन में सुख की प्राप्ति संभव नहीं है। जीवन में सदैव मोह से बचें। पानी पर खीचीं गई लकीर की कोई उम्र नहीं होती। जीवन भी लगभग ऐसा ही है। पता नहीं कब कूच करने का नगाड़ा बज जाए। इसलिए सौ काम छोड़कर सत्संग में बैठना चाहिए।
मुनिश्री यशोधर सागर एवं मुनिश्री स्वयंभू सागर महाराज ने ससंघ सोनागिर के लिए पद विहार किया। वे मामा का बाजार जैन मंदिर से पद विहार करते हुए सिंधी कालोनी, गुढ़ागुढ़ी का नाका होते हुए ड्रीम वेली कॉलेज पहुंचकर रात्रि विश्राम करेंगे।