फीस-ड्रेस के लिए तो मॉनिटरिंग स्कूलों में सुरक्षा का ध्यान नहीं
शहर के एक निजी स्कूल से एक बच्चे का अपहरण हुआ, जो छह दिन बाद फिरौती देकर ही छूट सका। इस घटना के बाद सभी अभिभावक स्कूलों में अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। लेकिन शासन और जिला प्रशासन स्तर पर इस मसले पर गंभीरता नहीं दिखाई गई है। खास बात यह है कि शहर के स्कूलों में फीस निर्धारण, ड्रेस और किताबों के नियमन के लिए तो मॉनिटरिंग की जाती है। लेकिन विद्यार्थियों की सुरक्षा की मॉनीटरिंग किसी भी स्तर पर नहीं हो रही है। जिन स्कूलों में कैमरे लगे हैं, वहां नियमित मॉनीटरिंग नहीं होती है। शहर के बड़े स्कूलों में तो कैमरे और सुरक्षा गार्ड का इंतजाम है लेकिन छोटे स्कूलों में सुरक्षा की यह दोनों व्यवस्थाएं ही नहीं हैं। सुरक्षा इंतजामों की मॉनीटरिंग के लिए अब तक न तो शिक्षा विभाग ने पहल की और न ही प्रशासन ने। डीपीए स्कूल से 5 वर्ष के छात्र रामेंद्र गुर्जर के अपहरण की घटना के बाद स्कूलों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खुली है और अब इस मुद्दे पर भी विश्लेषण की जरूरत है।
अपहरणकर्ताओं ने छात्र रामेंद्र का अपहरण स्कूल के सुरक्षा इंतजामों में सेंध लगाकर किया था। जिस दिन अपहरण की वारदात हुई, उस दिन स्कूल के सीसीटीवी कैमरे खराब थे और गार्ड भी गेट पर बैठा सो रहा था। स्कूल के स्टाफ ने भी नहीं जानना चाहा कि जो व्यक्ति रामेंद्र को ले जा रहा है, वह कौन है? स्कूल में हुई इस सनसनीखेज वारदात के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग और प्रशासन ने स्कूलों में सुरक्षा इंतजामों की मॉनीटरिंग के लिए कोई पहल नहीं की है।
स्कूल से लौटते बच्चे। (फाइल फोटो)
अभिभावक इन बातों का रखें ख्याल
जिस वाहन से बच्चा स्कूल जाता है, उसके ड्राइवर और स्टाफ की पूरी जानकारी रखें। बच्चे को यह समझाकर रखें कि वह किसी भी अनजान के साथ किसी भी लालच या भय में न जाए। अगर कोई जबरन ले जाने का प्रयास करे तो शोर मचाए। स्कूल डायरी में पैरेंट्स अपना मोबाइल या फोन नंबर जरूर लिखें और बच्चे को भी याद कराएं। स्कूल में भी यह बताएं कि उनके अलावा किसी भी स्थिति में अपरिचित को बच्चा न सौंपा जाए।
सावधान: शहर में 18 हिस्ट्रीशीटर ऑटो चला रहे हैं, स्कूलों में भी जाते हैं
शहर के 18 ऑटो ड्राइवर हिस्ट्रीशीटर हैं। इनका आपराधिक रिकॉर्ड पुलिस के पास है। यह पुलिस के रिकॉर्ड से ही पता चला है। इनमें से कुछ ऑटो ड्राइवर स्कूल से बच्चाें काे लाने-ले जाने का काम भी करते हैं। इसलिए अब वाहन ड्राइवरों का वेरीफिकेशन कराए जाने की जरूरत ज्यादा है।
हम सतर्क हैं, काउंसिलिंग शुरू की है
विद्यार्थियों की सुरक्षा के मुद्दे पर हम पहले से ही सतर्क हैं। रामेंद अपहरणकांड एक अनहोनी थी। इसके बाद और सतर्कता बरती जा रही है। स्कूल संचालकों से कहा जा रहा है कि वे छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की काउंसिलिंग करें ताकि विद्यार्थी किसी भी अनजान की बातों में आकर स्कूल न छोड़ें। राहुल श्रीवास्तव, सीबीएसई प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन
बच्चों की सुरक्षा के लिए कैसे इंतजाम करना है, इसके टिप्स स्कूल संचालकों को दिए जाएंगे। इस संबंध में मॉनीटरिंग के लिए जिला प्रशासन से मिलकर काम किया जाएगा। हरिनारायणचारी मिश्रा, एसपी, ग्वालियर
स्कूल संचालकों की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। इसमें स्कूल परिसर, वाहनों में कैमरे लगाने उनकी मॉनिटरिंग पर बात होगी। कुछ और मुद्दे जो बच्चों के हित में होंगे उन्हें भी बैठक में रखा जाएगा। डॉ. संजय गोयल, कलेक्टर
जानिए
पुलिस के नजरिए से यह होने चाहिए सुरक्षा के मानक, लेकिन पालन नहीं
शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए, तो ज्यादातर स्कूलों के परिसर के साथ ही वाहनों में भी सुरक्षा को लेकर मानकों की अनदेखी की जा रही है। पुलिस अफसरों का मानना है कि सुरक्षा के लिहाज से यह मानक होना चाहिए।
शहर के ज्यादातर स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं। जिनमें लगे हैं, उनमें नियमित मॉनीटरिंग का अभाव है।
स्कूलों की सुरक्षा में लगे गार्ड भी ट्रेंड नहीं होते हैं। वह भी स्कूल की सुरक्षा के मुताबिक।
स्कूलों में उन अभिभावकों के फोटो भी नहीं हैं, जो बच्चों को नियमित रूप से लेने आते हैं। ऐसे अभिभावकों के न आने की स्थिति में कौन बच्चे को लेने आएगा, उसका भी फोटो स्कूलों में नहीं है। इस मामले में स्कूल प्रबंधन भी गंभीर नहीं है।
कुछ स्कूलों में बाउंड्रीवाल भी उतनी ऊंची नहीं है, जितनी सुरक्षा के लिहाज से होना चाहिए।
स्कूल के स्टाफ, कैंटीन के स्टाफ और स्कूली वाहनों को चलाने वालों का वेरीफिकेशन भी नियमित रूप से नहीं कराया जाता है।
स्कूली वाहन में तैनात स्टाफ अक्सर बच्चों को स्टॉपेज से पहले ही उतार देता है। इस तरह की शिकायतें सामने आती हैं।
विकास जोशी
डीईओ
शासन स्तर पर चल रही है प्रक्रिया
छात्र रामेंद्र के स्कूल से अपहरण के बाद स्कूलों में सुरक्षा इंतजामों की मॉनीटरिंग के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है?
वह सीबीएसई संबद्ध स्कूल है। इसलिए वह हमारे कार्यक्षेत्र में नहीं आता है।
घटना किसी भी स्कूल में हो सकती है। स्कूलों में क्या इंतजाम करवाए जाएंगे?
यह नीतिगत निर्णय से जुड़ी बातें हैं। शासन स्तर पर इसकी प्रक्रिया चल रही है।
स्थानीय स्तर पर घटना हुई है, तो यहां कोई इंतजाम किए जा रहे हैं?
स्कूलों में सुरक्षा इंतजाम हैं। इस संबंध में प्रशासन से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।