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सिर्फ 7 घंटे के लिए बने एसोसिएट प्रोफेसर

5 वर्ष पहले
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पद खाली नहीं था, कर दिया प्रमोशन, गलती पता चली तो फिर बनाया असिस्टेंट प्रोफेसर
जीआरएमसी
गजराराजा मेडिकल कॉलेज में एक असिस्टेंट प्रोफेसर पदोन्नति देकर 7 घंटे के लिए एसोसिएट प्रोफेसर बनाए गए। एमसीआई के सामने एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में हेडकाउंट भी कराया। पदोन्नति मिलने पर सहयोगियों ने बधाइयां भी दे दीं, लेकिन शाम होते-होते उनकी खुशी को उस समय ग्रहण लग गया, जब उन्हें डीन कार्यालय में बुलाकर पत्र थमाते हुए कहा गया कि एसोसिएट प्रोफेसर का पद रिक्त नहीं है। त्रुटिवश इस सूची में आपका नाम आ गया है। प्रमोशन पाने वाले संभावित असिस्टेंट प्रोफेसर की सूची में आपका नाम है। आपके विभागाध्यक्ष का जैसे प्रमोशन प्रोफेसर पद पर होगा वैसे ही आपका प्रमोशन एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कर दिया जाएगा। तब तक आप असिस्टेंट प्रोफेसर ही हैं।

चिकित्सा शिक्षा विभाग में हाल ही में कुछ डॉक्टरों का असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन किया गया था,लेकिन इनके आदेश नहीं आए थे। जीआरएमसी में एमसीआई की टीम के आने की सूचना पाकर शुक्रवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रमोशन के आदेश सुबह 11 बजे कॉलेज में फैक्स द्वारा भेज दिए। फैक्स आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी आदेश जारी करते हुए प्रमोशन पाने वाले डॉक्टर का हेडकांउट एमसीआई के सामने एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में ही कराया। प्रमोशन पाने वालों में एनाटोमी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश त्रिवेदी का भी नाम था। डॉ. त्रिवेदी का हेडकाउंट एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में एमसीआई के सामने हुआ। पदोन्नति मिलने पर डॉ. त्रिवेदी को सहयोगियों ने बधाई दी। शाम होते -होते यह पता चल गया कि गलती से डॉ. त्रिवेदी के आदेश निकले हैं। लिहाजा डीन कार्यालय में बुलाकर उन्हें वह पत्र थमाते हुए कहा गया कि एसोसिएट प्रोफेसर का पद रिक्त नहीं है त्रुटिवश इस सूची में आपका नाम आ गया है। प्रमोशन पाने वाले संभावित असिस्टेंट प्रोफेसर की सूची में आपका नाम है। आपके विभागाध्यक्ष का जैसे ही प्रमोशन प्रोफेसर पद पर होगा वैसे ही आपका प्रमोशन एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कर दिया जाएगा। तब तक आप असिस्टेंट प्रोफेसर ही हैं।

ज्ञात रहे कि यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा हुआ है। 2013 में भी एमसीआई के सामने 4 एसोसिएट प्रोफेसरों को टाइम स्केल प्रमोशन देकर प्रोफेसर के रूप में एमसीआई के सामने पेश किया था। हेडकाउंट के चार घंटे बाद उन्हें प्रमोशन निरस्त करने के आदेश थमा दिए थे। इस पूरे मामले में न तो कॉलेज प्रशासन कुछ बोल रहा है और न ही डीएमई कार्यालय। डॉ. त्रिवेदी का प्रमोशन कॉलेज और अस्पताल में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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