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ट्रक से टकराकर उछली कार और पलट गई राहगीर और कॉलेज स्टाफ ने बाहर निकाला

5 वर्ष पहले
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मेरी शादी की तैयारियों को लेकर उत्साहित थीं दीदी:विवेक
हादसा: दोनों साइड का ट्रैफिक एक ही रोड पर लेकिन संकेतक नहीं

क्राइम रिपोर्टर|ग्वालियर

झांसी रोड पर ड्रीम वेली कॉलेज के पास लोहे से भरे ट्रक व कार में हुई टक्कर के बाद कार तेजी से उछली अौर डिवाइडर के पास पलट गई। घटना के वक्त कॉलेज का स्टाफ व छात्र अंदर घुस रहे थे, कार को उछलता देख सभी ठहर गए। हादसा सड़क निर्माण कंपनी की लापरवाही के कारण होना माना जा रहा है। फोरलेन सड़क के एक साइड पर पुताई व मेंटेनेंस चल रहा है, इसी कारण दोनों तरफ का ट्रैफिक एक ही साइड से निकल रहा है पर सावधानी या संभलकर चलने जैसी सूचना नहीं लगाई गई है न ही यहां पर डायवर्सन संबंधी संकेतक लगे हैं।

कॉलेज के डायरेक्टर अनुपम राठौर व स्टाफ ने ड्राइविंग सीट पर बैठे अरविंद को देखा तो उनकी सांसें चल रही थीं पर स्टेयरिंग उनके शरीर में धंसी हुई थी। पास बैठी उनकी प|ी शिखा की मौत हो चुकी थी। अरविंद को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान स्टेयरिंग से हटाते ही उनकी भी मौत हो गई। स्टाफ व राहगीरों ने पीछे की सीट पर बैठी बच्ची उर्मी व तुषी को बाहर निकाला। उर्मी गंभीर रूप से घायल थी जबकि तुषी ठीक थी पर सहमी हुई। अरविंद अपने परिवार के साथ रात में होटल ग्रेस में रुके थे। वे सुबह 9.30 बजे ही इटारसी के लिए निकले थे। दो साल पहले ही उन्होंने कार खरीदी थी।

ड्रीमवैली के स्टाफ की गोद में तुषी।

बेटियों का फोटो आज ही वॉट्स एप पर किया था अपलोड
अरविंद के फूफा गुड्डू ने बताया कि अरविंद काफी मिलनसार था और शिखा भी। शादी 10 साल पहले हुई थी, पूरे परिवार को दोनों पर नाज था। सभी कहते थे इन्हें किसी की नजर न लगे। अरविंद दोनों बेटियों को लेकर मुझसे कहता था कि मेरी बेटियां सबसे सुंदर और अच्छी हैं। उसने आज ही दोनों बेटियों का एक फोटो वाट्सएप पर अपलोड किया था। हादसे के बाद पकड़े गए ट्रक ड्राइवर ने बताया कि ड्राइविंग सीट पर बैठे व्यक्ति को पास बैठी महिला हाथ पकड़ कर रोकने की कोशिश कर रही थी। ड्राइवर ने बताया कि उसके ट्रक की स्पीड काफी स्लो (20 किमी प्रति घंटा) थी।

सुबह से सहमी तुषी ने शाम को खाई टॉफी

हादसे के बाद सहमी तुषी ने सुबह से कुछ नहीं खाया। बच्ची कॉलेज डायरेक्टर के परिवार के पास है। आयुषी ने रात में टॉफी खाई। बच्ची के मामा विवेक और नाना अमरजीत सिंह भी ग्वालियर आ गए। कॉलेज स्टाफ भी रात तक अस्पताल में उर्वशी की देखभाल में लगा रहा। विवेक भी सेना में (जम्मू) में पदस्थ हैं।

अरविंद के साले विवेक ने बताया कि हमारे लिए सब कुछ बहन-बहनोई ही थे। शिखा हमारी इकलौती बहन थी, वह अपने भाई की शादी के लिए काफी उत्साहित थीं और अभी से शादी की तैयारियां में जुट गई थीं। शादी की डेट अभी तय नहीं थी वह बच्चों के पेपर के बाद शादी की डेट तय की जाना थी। हमारे सभी कार्य जीजा अरविंद के अनुसार ही तय होते थे वह सभी को बहुत चाहते थे। विवेक ने बताया कि जीजा को शनिवार को निकलना था लेकिन वह एक दिन अपनी मर्जी से रुक गए और रविवार की शाम को निकले। शिखा का मायका हापुड़ में था और ससुराल बुलंदशहर में।

रास्ते में उर्मी की थम गई थी सांस, पंपिंग कर लौटाया
ड्रीम वेली कॉलेज के निदेशक की कार से उर्मी को तत्काल जेएएच भेजकर 8 मिनट में ही उसे भर्ती करा दिया गया। रास्ते में उसकी धड़कन थमी थी पर डॉक्टरों ने पंपिंग कर व कृत्रिम सांस देकर उसके दिल की धड़कन शुरू की।

गहनों का बैग मिला: थाना प्रभारी राजकुमार शर्मा ने बताया अरविंद की कार में शिखा के गहनों का बैग भी था। जो परिजन को सौंप दिया है।

झांसी रोड पर हुए हादसे से बाद क्षतिग्रस्त कार को खींचती क्रेन। इनसेट में हादसे के कारण बना ट्रक।

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