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रॉ मटेरियल का ट्रेंड देखें, फिर मार्केट तलाश करें, इसके बाद लगाएं यूनिट

5 वर्ष पहले
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सिटी रिपोर्टर अगर आप फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहते हैं तो इसके लिए संबंधित क्षेत्र में रॉ मटेरियल का ट्रेंड जानना होगा। क्षेत्र की जरूरत क्या है और इंडस्ट्री की जरूरत कैसे पूरी होगी। आप जिस चीज का उत्पादन करना चाहते हैं, पहले वो मार्केट तलाशें फिर यूनिट लगाने की शुरुआत करें। इस तरह फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं। यह बात एक्सपर्ट ने कही। सोमवार को मिनिस्ट्री ऑफ फूड एंड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और द एसोसिएटेड चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया (एसोचैम) के संयुक्त तत्वावधान में एग्रीकल्चर कॉलेज के सभागार में एग्री एंड फूड प्रोसेसर्स कॉन्क्लेव कराई गई। एक्सपर्ट ने कहा कि जो भी यूनिट लगाएं उसका एक्रीडिटेशन जरूर कराएं। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

लोकल मार्केटिंग प्रोग्राम से मिलेगा फायदा
एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.एके सिंह ने कहा कि मप्र को 11 एग्रो क्लाइमेट डिवीजन में भी रखा गया है। हमें फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए लोकल मार्केटिंग प्रोग्राम विकसित करना होगा। इससे फायदा यह होगा कि उत्पादन अच्छे स्तर का होगा और उपभोक्ताओं को सही दामों में वस्तु मिल सकेगी।

एक्सपर्ट ने कहा कि मप्र में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री का स्कोप बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए भी है कि मेक इन इंडिया की तर्ज पर मेक इन मप्र अभियान चलाया जा रहा है।

यह भी बताया
क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के द नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज (एनएबीसीबी) के एक्सपर्ट उदय कुमार सक्सेना ने कहा कि एनएबीसीबी कई तरह के एक्रीडिटेशन ऑफर करता है। इसमें फूड सेफ्टी मैनेजमेंट, प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सहित अन्य शामिल हैं। जानकारी www.qci.org से ले सकते हैं।

ऑनलाइन पोर्टल से जानें
एसबीआई के एजीएम अवधेश चंद्र सक्सेना ने कहा कि ग्वालियर-चंबल संभाग में एग्रो फूड प्रोसेसिंग में स्माॅल यूनिट ज्यादा हैं। जो लोग इस क्षेत्र में आना चाहते हैं उनकी सहूलियत के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। इस पर आवेदन करने के साथ वह यह जान सकते हैं कि प्रक्रिया कहां तक पूरी हुई है।

प्रदेश में बेहतर संभावनाएं
डिप्टी कमिश्नर विनोद भार्गव ने कहा कि प्रदेश में 6 सरकारी मॉडर्न फूड पार्क और 2 प्राइवेट फूड पार्क हैं। इसलिए यहां फूड प्रोसेसिंग में बेहतर संभावनाएं हैं। साथ ही युवाओं को क्वालिटी टेस्टिंग और नई एग्री टेक्नोलॉजी के जरिए उत्पादन क्षमता भी बढ़ानी होगी।

सरकार ने दिए 2 हजार करोड़
नाबार्ड के असिस्टेंट जनरल मैनेजर संजीव रमन ने कहा कि केंद्र सरकार ने फूड प्रोसेसिंग के लिए 2 हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। इसमें वो लोग आवेदन कर सकते हैं, जो फूड पार्क में यूनिट लगाने जा रहे हैं।

यह भी रखे सुझाव
एजुकेशन रिसर्च और एक्सटेंशन गतिविधि हों।

ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती कम करनी होगी।

विदेशी इन्वेस्टर्स हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहतर करना होगा।

मंडी स्तर से हमें गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है।

यह रहे मौजूद: कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजमाता विजयाराजे सिंधिया एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.एके सिंह थे। इस मौके पर डिप्टी कमिश्नर विनोद भार्गव, एग्रीकल्चर कॉलेज के डीन डॉ.जेपी दीक्षित, ज्वाइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर राजीव जोशी, एसोचैम की डिप्टी डायरेक्टर पूर्णिमा ढींगरा, चेंबर ऑफ कॉमर्स के मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल, डॉ.एमएम पटेल, डॉ.सुरेश सिंह तोमर, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के उदय कुमार सक्सेना और डॉ.सुधीर चतुर्वेदी मौजूद रहे।

मिनिस्ट्री ऑफ फूड एंड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज और एसोचैम के सहयोग से हुई एग्री एंड फूड प्रोसेसर कॉन्क्लेव में एक्सपर्ट ने दी जानकारी
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